पिघलती बर्फ, तपती धरती से बढ़ता खतरा

By योगेश कुमार गोयल | Updated: April 22, 2026 07:21 IST2026-04-22T07:21:17+5:302026-04-22T07:21:42+5:30

इसी रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले एक दशक में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और मौजूदा उत्सर्जन दर को देखते हुए हम 2030 तक यह वृद्धि 1.5 डिग्री के पार कर लेंगे.  

Melting ice and warming earth pose growing threats | पिघलती बर्फ, तपती धरती से बढ़ता खतरा

पिघलती बर्फ, तपती धरती से बढ़ता खतरा

प्रकृति ने हमें जो कुछ भी दिया है, वह जीवन को पोषित करने वाला है लेकिन आज का यथार्थ यह है कि वही प्रकृति अब धीरे-धीरे संकट में पड़ रही है. इसी संकट की ओर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने और पृथ्वी को संरक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य है कि हम अपनी पृथ्वी के संरक्षण के लिए वास्तविक और व्यावहारिक कदम उठाएं.

पृथ्वी दिवस का आयोजन कोई नया नहीं है. इसकी शुरुआत वर्ष 1970 में अमेरिका से हुई थी और आज यह विश्व के 190 से अधिक देशों में प्रतिवर्ष एक अरब से ज्यादा लोगों की भागीदारी वाला सबसे बड़ा नागरिक आंदोलन बन चुका है, मगर इसके बावजूद पृथ्वी की हालत में सुधार के बजाय गिरावट ही नजर आ रही है. इस वर्ष पृथ्वी दिवस की वैश्विक थीम है ‘हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’, जो इस ओर संकेत करती है कि अब समय आ गया है, जब हम सबको मिलकर समझना होगा कि पृथ्वी को बचाने की शक्ति स्वयं हमारे हाथों में है.

वैज्ञानिक चेतावनियां, नई-नई रिपोर्टें और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संकेत वर्षों से दिए जा रहे हैं, परंतु सामूहिक संकल्प और त्वरित कार्रवाई अब भी बेहद सीमित है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की नवीनतम रिपोर्टें इस दिशा में बेहद चिंताजनक संकेत दे रही हैं.

आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि वैश्विक तापमान की वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित नहीं किया गया तो न केवल ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघलेगी बल्कि वैश्विक समुद्र स्तर में इतनी वृद्धि होगी कि लाखों तटीय नगर जलमग्न हो जाएंगे. इसी रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले एक दशक में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और मौजूदा उत्सर्जन दर को देखते हुए हम 2030 तक यह वृद्धि 1.5 डिग्री के पार कर लेंगे.  

वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की ‘स्टेट ऑफ द क्लाइमेट 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, 2024 पृथ्वी के इतिहास का अब तक का सबसे गर्म वर्ष था. रिपोर्ट में चेताया गया था कि वैश्विक औसत तापमान 1.58 डिग्री तक पहुंच चुका है. पृथ्वी के कुछ हिस्सों में तापमान 45 से 50 डिग्री के बीच पहुंचने लगा है, जो सीधे जीवन और जीविका को खतरे में डाल रहा है. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया जैसे घनी आबादी वाले देशों में लू और हीटवेव की घटनाएं रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने लगी हैं. ‘ग्लोबल क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स’ के अनुसार भारत दुनिया के उन 10 देशों में शामिल है, जो जलवायु परिवर्तन के खतरों से सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं.

Web Title: Melting ice and warming earth pose growing threats

भारत से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे