बीजेपी की पूर्व सांसद मेनका गांधी के पति संजय गांधी के नाम से खुश नहीं सम्राट चौधरी?, संजय गांधी जैविक उद्यान और संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम बदला

By एस पी सिन्हा | Updated: April 30, 2026 15:16 IST2026-04-30T15:13:45+5:302026-04-30T15:16:05+5:30

संस्थानों का इतिहास दशकों पुराना है। चिड़ियाघर की नींव 1969 में पड़ी थी जब तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की जमीन दान दी थी, जो 1973 में आम जनता के लिए खुला।

bihar cm Samrat Chaudhary not happy name former BJP MP Maneka Gandhi's husband and late Congress leader Sanjay Gandhi? Sanjay Gandhi Biological Park and Sanjay Gandhi Dairy Technology Institute renamed | बीजेपी की पूर्व सांसद मेनका गांधी के पति संजय गांधी के नाम से खुश नहीं सम्राट चौधरी?, संजय गांधी जैविक उद्यान और संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम बदला

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Highlightsपटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान को अब पटना जू के नाम से जाना जाएगा।संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास समिति से पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया गया है।राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

पटनाः बिहार में नीतीश कुमार के द्वारा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री को ताज सौंपते ही "गांधी" परिवार का नाम मिटाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। सम्राट सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पटना चिड़ियाघर और डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान से संजय गांधी का नाम हटा दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार की शाम हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में देश में इमरजेंसी लगाने के सूत्रधार कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी का नाम राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से डिलीट कर दिया है। पटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान को अब पटना जू के नाम से जाना जाएगा।

आम लोग पहले भी इसे पटना का चिड़ियाखाना या पटना जू ही कहते थे, लेकिन कागज पर नाम संजय गांधी से ही शुरू होता था। वन और पर्यावरण विभाग के अंतर्गत जू को संचालित करने वाली समिति का नाम संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास समिति से पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया गया है।

इसके साथ ही संजय गांधी डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम बदलकर 'बिहार राज्य डेयरी प्रौद्योगिकी संस्थान' कर दिया है। सरकार का तर्क है कि इन संस्थानों की पहचान अब उनके स्थान और राज्य के नाम से होगी। ये कदम न केवल प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि इसे राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

बता दें कि इन संस्थानों का इतिहास दशकों पुराना है। चिड़ियाघर की नींव 1969 में पड़ी थी जब तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की जमीन दान दी थी, जो 1973 में आम जनता के लिए खुला। राजभवन ने 34 एकड़ जमीन दान में दी। 1972 में इसमें बिहार सरकार ने लगभग 120 एकड़ जमीन और जोड़कर इसे जैविक उद्यान और बोटैनिकल पार्क का रूप दे दिया।

वर्तमान में ये देश का चौथा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है, जहां 110 प्रजातियों के करीब 800 जीव रहते हैं। बाघ, शेर, राइनो, हिरण, सांप वगैरह शामिल हैं। इस उद्यान में लगभग 300 तरह के पेड़-पौधे हैं। इसके साथ ही बिहार पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम अब 'बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना' होगा।

ये संस्थान राज्य में डेयरी शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहां छात्रों को डेयरी से जुड़े पेशेवर शिक्षा दी जाती है। इसमें डेयरी टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग, दूध प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीक, डेयरी केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी, गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच, डेयरी बिजनेस मैनेजमेंट, व्यवसाय और प्रबंधन के गुर, डेयरी एक्सटेंशन एजुकेशन और किसानों और समाज तक तकनीक पहुंचाने के गुर सिखाए जाते हैं।

राज्य में जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, तब संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना 1980 में हुई थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त है। इस डेयरी संस्थान का पहला बैच पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में 1982 में आया था। इसके बाद 1986 में डेयरी संस्थान को पटना लाया गया। अभी जहां है, वहां 1999 में अपने मौजूदा कैंपस में गया।

हालांकि, कुछ समय के लिए संस्थान को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) से भी जोड़ा गया था। कई चरणों में विकसित कर इस संस्थान को 2016 में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय से जोड़ा गया था। इसबीच इन संस्थानों से कांग्रेस नेता संजय गांधी का नाम हटाए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने नाराजगी जताई है।

सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति करती है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि हमें गर्व है कि हमने संयुक्त बिहार को संजय गांधी जैविक उद्यान के रूप में पहला चिड़ियाघर दिया था।

आज भाजपा और वर्तमान सरकार केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। नाम बदलने से बेहतर होता कि मुख्यमंत्री अपने क्षेत्र में एक नया जू बनवाते। अगर उन्हें नाम ही रखना था, तो अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम पर नया चिड़ियाघर बनवाते वह ज्यादा बेहतर होता।

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