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 युवा प्रतिभाएं देंगी एआई क्रांति को नई दिशा

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 9, 2025 06:44 IST

आज भारत में एआई का उपयोग हर क्षेत्र में होने लगा है और उसका तेजी से विस्तार हो रहा है.

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मौजूदा युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है और इससे मानव जीवन में जल्द ही बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इस तकनीक से मानव सभ्यता नई  ऊंचाइयों को स्पर्श करेंगी. युवा शक्ति से भरपूर हमारा देश एआई को तेजी से अपना रहा है. ऐसे में भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है. विश्व की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसाॅफ्ट भारत में एक करोड़ युवाओं को एआई तकनीक का प्रशिक्षण देगा.

इसके लिए माइक्रोसाॅफ्ट भारत में तीन अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है. माइक्रोसाॅफ्ट के भारतीय मूल के मुखिया सत्य नडेला ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उक्त घोषणा की. माइक्रोसाॅफ्ट की पहल से भारत में एआई के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात हो सकता है. नडेला इस बात से बेहद प्रभावित हैं कि भारत में एआई का प्रसार तेजी से हो रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी का मकसद भारत में प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है.

इसी उद्देश्य के साथ उनकी कंपनी 2030 तक भारत में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षित करेगी. एआई से मानव जीवन के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आना तय है. वर्तमान एआई तकनीक में असीम क्षमताएं हैं लेकिन साथ ही उसकी अपनी सीमाएं भी हैं. उदाहरण के तौर पर छवि पहचान तथा निर्माण में पारंगत एआई मॉडल वेबसाइट नहीं बना सकते. लेकिन समय के साथ-साथ निश्चित रूप से बेहतरी आती जाएगी. आज एआई मानव जीवन के हर क्षेत्र में प्रयुक्त किया जा रहा है.

स्वास्थ्य सेवा से लेकर प्रशासनिक कामकाज, व्यवसाय, उद्योग, शिक्षा समेत ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जिसमें एआई का इस्तेमाल न हो रहा हो. वास्तव में एआई ने मनुष्य की क्षमता को नया विस्तार दिया है. इसके उपयोग से समय और लागत की बचत तो होती ही है, साथ ही कार्य निष्पादन भी सटीक होता है. भारत विकसित देशों की श्रेणी में  आने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. एआई का उपयोग 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका अदा करेगा.

भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां की आबादी में युवकों की संख्या ज्यादा है. किसी भी देश के विकास में युवा शक्ति आधार स्तंभ का काम करती है. युवा शक्ति की सहभागिता के साथ विकास का भारत सबसे अच्छा उदाहरण है. भारत में युवा शक्ति नई-नई तकनीक को तेजी से अपना रही है. इसीलिए तकनीक के क्षेत्र में भारत एक महाशक्ति बन गया है. भारत में एआई के तेजी से प्रसार का कारण भी यही है कि युवा उसे अपनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं. भारतीय युवाओं की एआई में रुचि तेजी से बढ़ रही है और वे इसमें अपना तथा देश का भविष्य संवारने की असीम संभावनाओं को तलाश रहे हैं.

माइक्रोसॉफ्ट ने एआई के उपयोग के प्रति भारतीय युवाओं की बढ़ती दिलचस्पी को देखा, नई तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की उनकी क्षमता पहचाना और इसी कारण उसने एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण देने का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम हाथ में लिया. एआई रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है, जिससे नई कार्य संस्कृति विकसित होती है और समय तथा लागत दोनों की बचत होती है. मनुष्य की तुलना में एआई बहुत कम समय में डाटा विश्लेषण करता है. इससे कम समय में सटीक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है. एआई से वे सब काम सुव्यव्यस्थित तथा स्वचालित हो सकते हैं, जिन्हें पूरा करने में मनुष्य को काफी लंबा समय लगता है.

डाटा का विश्लेषण करते समय एआई के उपयोग से गलतियों की संभावना कम होती है. युवाओं की उत्सुकता नई तकनीक को जानने, पहचानने तथा उसे अपनाने में ज्यादा होती है. तकनीक के क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने जिस तेजी से अपने कौशल का लोहा मनवाया है, उसके कारण भारत तकनीक के मामले में वैश्विक शक्ति देखते-देखते बन गया. एआई के आगमन के साथ ही भारत में  उसके उपयोग को लेकर कुछ क्षेत्रों में शंकाएं जताई जाने लगी थीं. सबसे ज्यादा आशंका एआई के दुरुपयोग को लेकर थीं.

इस तकनीक के दुरुपयोग की कुछ घटनाएं सामने भी आईं जिसके कारण एआई के प्रति दुष्प्रचार ने भी जोर पकड़ा लेकिन भारतीय युवाओं ने दूरदर्शिता तथा रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ एआई को अपनाया. आज भारत में एआई का उपयोग हर क्षेत्र में होने लगा है और उसका तेजी से विस्तार हो रहा है.

आने वाले वर्षों में उसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे और माइक्रोसॉफ्ट का महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम देश में एआई क्रांति को निश्चित रूप से नई दिशा देगा. ये एक करोड़ प्रशिक्षित युवा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को साकार कर दिखाएंगे.

टॅग्स :Youth Affairs DepartmentArtificial intelligenceTechnical Education and Medical Education and ResearchScience and Technology Councils
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