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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: हमें प्लास्टिक-मुक्त भारत चाहिए

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: June 25, 2019 06:16 IST

प्लास्टिक के बर्तनों और थैलियों से मनुष्य कैंसर, सिरोसिस और फेफड़ों की बीमारियों का शिकार हो रहा है. फिर भी वह प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल बड़े शौक से करता है. अकेले भारत में प्लास्टिक उद्योग 2.25 लाख करोड़ रु. का है और इसमें 45 लाख लोग लगे हैं.

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प्लास्टिक सारी मनुष्यता का कितना बड़ा दुश्मन है, इसकी कल्पना हमें जरा भी नहीं है. पिछले पचास-पचपन साल में प्लास्टिक के बर्तनों, थैलियों, लिफाफों, खिलौनों, उपकरणों आदि ने सारी दुनिया पर कब्जा कर लिया है. क्या नालियां, क्या नदियां, क्या तालाब और क्या समुद्र- सभी जगह प्लास्टिक तैरता हुआ दिखाई पड़ता है. उसे निगलने पर सामुद्रिक जीव तो मरते ही हैं, पशु-पक्षी भी मरते हैं.

प्लास्टिक के बर्तनों और थैलियों से मनुष्य कैंसर, सिरोसिस और फेफड़ों की बीमारियों का शिकार हो रहा है. फिर भी वह प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल बड़े शौक से करता है. अकेले भारत में प्लास्टिक उद्योग 2.25 लाख करोड़ रु. का है और इसमें 45 लाख लोग लगे हैं. जरा कल्पना कीजिए कि अमेरिका और यूरोप के देशों में यह उद्योग कितना बड़ा होगा. यह उद्योग जितना बढ़ता चला जाएगा, दुनिया में न सिर्फ असाध्य रोग बढ़ेंगे बल्कि प्लास्टिक का भंडार इतना होगा कि लोगों का जीना दूभर हो जाएगा.

 ऐसे में क्या किया जाए? सबसे पहले तो सरकार को प्लास्टिक-निर्माण पर कड़ा प्रतिबंध लगाना चाहिए. प्लास्टिक के सिर्फ वे ही बर्तन या उपकरण बनाने दिए जाएं, जिनका खाने-पीने या पहनने में इस्तेमाल न हो. जो भी दुकानदार अपना माल प्लास्टिक की थैलियों में ग्राहकों को देते हैं, उन पर जुर्माना और सजा दोनों हो. इसके अलावा  राजनीतिक दलों को अपने लाखों कार्यकर्ताओं को प्लास्टिक-त्याग अभियान में जुटा देना चाहिए.

पंजाब के मुक्तसर नगर में समाजसेवियों ने एक अभियान चलाया है, जिसके तहत वे दुकानदारों को सिर्फ 5 रु. में कपड़े की थैली दे देते हैं ताकि वह ग्राहकों को दी जा सके और वे हमेशा के लिए प्लास्टिक की थैलियों से मुक्त हो सकें. कुछ लोगों ने अपने घरों में स्टील की बड़ी-बड़ी थालियां सैकड़ों की संख्या में रख रखी हैं, जिन्हें वे मुफ्त में इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं ताकि शादी-ब्याह की पार्टियों में प्लास्टिक की प्लेटों का इस्तेमाल रुके. इस तरह के कई अभियान देश में एक साथ चलने चाहिए. हम चाहें तो 2019 को प्लास्टिक-मुक्त वर्ष के रूप में घोषित कर सकते हैं. 

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