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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉगः नेताओं के चुनावी मुखौटे

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: November 13, 2018 21:36 IST

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस हर नागरिक को चावल एक रु. किलो देने का वादा कर रही है। मोदी अपने भाषणों में कांग्रेस को शहरी नक्सलवादियों का संरक्षक बता रहे हैं और राहुल गांधी उनको बैंक-लुटेरों, सेठों का संरक्षक चित्रित कर रहे हैं।

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पहले हर चुनाव के दौरान घोषणा-पत्न जारी होते थे। आजकल उन्हें संकल्प-पत्न और वचन-पत्न कहकर जारी किया जाता है। विभिन्न पार्टियों के घोषणा-पत्नों में उन पार्टियों की विचारधारा, नीतियों और कार्यक्र मों का विवरण हुआ करता था लेकिन अब कौन सी पार्टी बची है जो कहे उसकी विचारधारा ये है। चुनाव के दिनों में तो बस एक ही विचारधारा होती है कि चुनाव कैसे जीता जाए। उसके लिए जितनी झूठी-सच्ची जुमलेबाजी करनी हो, नेता करते हैं।

अभी पांच राज्यों में जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें पता नहीं कितने हवाई किले बांधे गए हैं। यह जानना ही मुश्किल हो जाता है कि कौन सा घोषणा-पत्न किस पार्टी का है। कांग्रेस का वचन-पत्न पढ़ें तो ऐसा लगता है कि यदि वह सत्ता में आ गई तो हिंदुत्व की प्रखर समर्थक सिद्ध होगी। कांग्रेस खुद  को भाजपा से भी बड़ी गौसेवक बताते हुए सरकार को गोमूत्न विक्रे ता बनाने का वादा करती है।

अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस हर नागरिक को चावल एक रु. किलो देने का वादा कर रही है। मोदी अपने भाषणों में कांग्रेस को शहरी नक्सलवादियों का संरक्षक बता रहे हैं और राहुल गांधी उनको बैंक-लुटेरों, सेठों का संरक्षक चित्रित कर रहे हैं। जो शब्द बोफोर्स को लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कभी राजीव गांधी के लिए नहीं कहे, उनका प्रयोग मोदी के लिए किया जा रहा है। सभी पार्टियां मर्यादा भंग कर रही हैं। भारत का संविधान देश को धर्म-निरपेक्ष कहता है लेकिन सारी पार्टियां चुनाव की बेला में धर्म-सापेक्ष हो जाती हैं।

जैसे सबरीमला के मामले में हो गई हैं। सारे उम्मीदवार जातीय गणित के आधार पर तय किए जाते हैं। राफेल जैसे सौदे आखिर किसलिए किए जाते हैं? चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाने के लिए। चुनाव के दिनों में नेताओं के खूबसूरत मुखौटे देखने लायक होते हैं। आपने देखा होगा कि घोर अहंकारी नेता भी आजकल कैसे झुक-झुककर प्रणाम कर रहे हैं। महकवि बिहारी ने क्या खूब कहा है- नमन-नमन बहु अंतरा, नमन-नमन बहु बान/ ये तीनों ज्यादा नवैं, चीता, चोर, कमान...

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