ब्लॉग: ऑनलाइन शिक्षा से क्यों होगा गरीबों का नुकसान, ये आंकड़े दिखा रहे हैं पूरी तस्वीर

By सुखदेव थोरात | Published: September 23, 2022 09:02 AM2022-09-23T09:02:51+5:302022-09-23T11:12:18+5:30

ऑनलाइन शिक्षा उपयोगी तरीका है, लेकिन इसका उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समूहों को बाहर न करे.

Online education is loss for poor where there is no internet and computer | ब्लॉग: ऑनलाइन शिक्षा से क्यों होगा गरीबों का नुकसान, ये आंकड़े दिखा रहे हैं पूरी तस्वीर

ऑनलाइन शिक्षा से गरीबों का नुकसान (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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कोविड के दौरान अस्थायी समाधान के रूप में शुरू हुए ऑनलाइन शिक्षण को अब नियमित रूप में अपनाया जा रहा है. यूजीसी ने कम्प्यूटर और इंटरनेट सुविधा तक पहुंच की कमी के कारण आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समूहों के बहिष्करण के जोखिम को महसूस किए बिना, ऑनलाइन पद्धति के माध्यम से कुछ हद तक शिक्षा प्रदान किए जाने की सिफारिश की है. इंटरनेट सुविधाओं तक असमान पहुंच के प्रभाव को न पहचानना संदेह पैदा करता है कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के तहत, छिपा उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समूहों की उच्च शिक्षा तक पहुंच को प्रतिबंधित करना तो नहीं है. 

इसलिए महाराष्ट्र में ऑनलाइन शिक्षण से जुड़ी समस्याओं का पता लगाना आवश्यक है. हम आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समूहों के लिए कम्प्यूटर और इंटरनेट तक बेहद कम पहुंच और उच्च शिक्षा तक पहुंच से बहिष्करण के भारी जोखिम को सामने रखना चाहते हैं.

ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच छात्रों के पास कम्प्यूटर/मोबाइल और इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता पर निर्भर करेगी. 2017-18 में महाराष्ट्र में केवल 14 प्रतिशत घरों में ही कम्प्यूटर थे. ग्रामीण क्षेत्रों में तो 3 प्रतिशत घरों में ही कम्प्यूटर हैं. जिन घरों में कम्प्यूटर नहीं हैं उनमें गरीबों और एसटी/एससी/ओबीसी/ बौद्ध/मुस्लिमों की बड़ी संख्या है. शीर्ष आय वर्ग के 38 प्रतिशत की तुलना में निम्न आय वर्ग के केवल 1.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत लोगों के पास ही कम्प्यूटर है. 

सामाजिक समूहों में केवल 3.8 प्रतिशत एसटी परिवारों के पास कम्प्यूटर है, जिसके आगे एससी (6.7 प्रतिशत), ओबीसी (9.2 प्रतिशत), बौद्ध (5.6 प्रतिशत) और मुस्लिम (10 प्रतिशत) हैं, जो उच्च जातियों के 24 प्रतिशत की तुलना में बहुत कम है. ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति बदतर है, जहां केवल 1.3 प्रतिशत एसटी, 1.6 प्रतिशत बौद्ध, 2.6 प्रतिशत एससी और 0.67 प्रतिशत  मुस्लिम के पास ही कम्प्यूटर हैं.

निम्न-आय वर्ग और एससी/एसटी/ओबीसी/ मुस्लिम/बौद्ध के पास इंटरनेट सुविधा की पहुंच की स्थिति भी खराब है. 2017-18 में महाराष्ट्र में लगभग 33 प्रतिशत घरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी थी, लेकिन शहरी क्षेत्र (52 प्रतिशत) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र (18.5 प्रतिशत) में इंटरनेट कनेक्टिविटी बहुत कम थी. उच्च आय वर्ग के 64 प्रतिशत की तुलना में  निम्न आय वर्ग के केवल 10 से 19 प्रतिशत की ही इंटरनेट सुविधा तक पहुंच थी. वास्तव में, दो तिहाई इंटरनेट कनेक्शन उच्च आय वर्ग के लोगों तक ही सीमित थे.

इसी प्रकार एसटी (14.5 प्रतिशत), एससी (21.6 प्रतिशत), ओबीसी (29 प्रतिशत) और बौद्ध (13.3 प्रतिशत) की इंटरनेट तक पहुंच काफी कम है. शहरी क्षेत्र में असमानताएं बहुत अधिक हैं. उच्च जातियों के लिए 65 प्रतिशत पहुंच के मुकाबले, एसटी (23 प्रतिशत) एससी (34 प्रतिशत), मुस्लिम (39 प्रतिशत) और बौद्ध (22 प्रतिशत) के लिए पहुंच बहुत कम है.

ऑनलाइन शिक्षा के लिए एक और आवश्यकता घर पर उचित स्थान और शांतिपूर्ण माहौल है. गरीब और कमजोर सामाजिक वर्गों के लिए स्थिति दयनीय है. महाराष्ट्र में अधिकांश गरीब और अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जाति/बौद्ध/मुसलमान छोटे घरों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं की आपूर्ति अनियमित है. 2017-18 में लगभग 64 प्रतिशत एसटी और 72 प्रतिशत एससी 500 वर्ग फुट के आकार के घरों में रहते थे. 

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की बड़ी संख्या (20 से 25 प्रतिशत) खराब मकानों में रहती है. वास्तव में उच्च जातियों के 10 प्रतिशत की तुलना में अनुसूचित जाति के 30 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के 23 प्रतिशत लोग झोपड़पट्टी में रहते हैं. ऑनलाइन शिक्षा के बारे में घरों की यह स्थिति है. कम्प्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की  ऐसी स्थिति के कारण कई लोग ऑनलाइन शिक्षा की प्रभावी पहुंच से बाहर हो जाएंगे. आश्चर्यजनक है कि ऑनलाइन शिक्षा को आगे जारी रखने का निर्णय अज्ञानतावश किया गया है या फिर जानबूझकर?

ऑनलाइन शिक्षा उपयोगी तरीका है, लेकिन इसका उपयोग इस तरह से किया जाना चाहिए कि यह आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित समूहों को बाहर न करे. विकल्प यह है कि शिक्षकों द्वारा छात्रों को ऑनलाइन लेक्चर दिया जाए जिसे छात्र कॉलेजों/ विश्वविद्यालयों में बैठ कर पढ़ें. इससे छात्रों की लंबी दूरी की विधा के उपयोग के जरिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पूरी तरह से पहुंच हो सकेगी - जैसा कि मुक्त विश्वविद्यालयों की प्रणाली में होता है.

Web Title: Online education is loss for poor where there is no internet and computer

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