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ब्लॉग: कैसे हों आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी? सामने हैं के.सुब्रमण्यम से लेकर टीएन शेषन और किरण बेदी जैसे कई उदाहरण

By विवेक शुक्ला | Updated: May 25, 2023 11:39 IST

आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या किसी अन्य अखिल भारतीय सेवा को क्रैक करने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है कि आप ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निवर्हन करें.

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संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा के साल 2022 के मंगलवार को नतीजे आने के बाद राजधानी के शाहजहां रोड पर स्थित यूपीएससी के धौलपुर हाउस दफ्तर में सफल अभ्यर्थियों के चेहरे खुशी से दमक रहे थे. जाहिर है, जिनके नतीजे उनके मन के नहीं आए वे निराश लग रहे थे. ये स्थिति यहां पर विगत दशकों से जारी है. 

नतीजे आने के कुछ दिनों बाद तक सफल कैंडिटेट के मीडिया में इंटरव्यू भी छपते रहते हैं. वे देश के कुछ समय तक नायक रहने के बाद नेपथ्य में चले जाते हैं. सच में अपने काम के बल पर बाद में गिनती के ही नौकरशाहों को याद किया जाता है या उनका उदाहरण दिया जाता है. 

इस लिहाज से के.सुब्रमण्यम टी.एन.शेषन, जगमोहन, ए.के.दामोदरन, किरण बेदी और निरूपमा राव जैसे कुछ अफसरों का ही ख्याल आता है. ए.के.दामोदरन ने ही भारत-सोवियत संघ के बीच साल 1971 में हुए शिमला समझौते का मसौदा तैयार किया था. टी.एन. शेषन ने पेट्रोलियम सचिव और फिर चुनाव आयोग के आयुक्त के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी. उन्होंने भारत में चुनावों में होने वाली धांधली को खत्म  करने की दिशा में बड़ी पहल की. 

अगर बात केरल में जन्मी निरुपमा मेनन राव की करें तो वह 1973 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुईं. अपने चार दशक लंबे राजनयिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यभार संभाले. किरण बेदी को कौन नहीं जानता. उन्होंने पुलिस अफसर रहते हुए जेलों की स्थिति को सुधारने की भरसक कोशिशें कीं. 

जगमोहन से भी सारा देश वाकिफ है. उन्होंने आईएएस अफसर के रूप में देश के शहरों को बेहतर बनाने की दिशा में श्रेष्ठ काम किया. के. सुब्रमण्यम 1951 बैच के आईएएस टॉपर थे. उन्होंने भारत की रक्षा नीति पर दशकों काम किया. उनके पुत्र एस. जयशंकर भारत के विदेश मंत्री हैं.

दरअसल आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या किसी अन्य अखिल भारतीय सेवा को क्रैक करने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है कि आप ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निवर्हन करें. भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार पटेल ने 21 अप्रैल, 1947 को दिल्ली के मेटकाफ हाउस में आजाद होने जा रहे भारत के पहले बैच के आईएएस और आईपीएस अफसरों को संबोधित करते cहुए कहा था कि “उन्हें स्वतंत्र भारत में जनता के सवालों को लेकर गंभीरता और सहानुभूति का भाव रखना होगा.” 

चूंकि सरदार पटेल ने 21 अप्रैल, 1947 को बाबुओं को संबोधित किया था इसलिए हर साल 21 अप्रैल लोकसेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. उस दिन अखिल भारतीय सेवाओं के विभिन्न अधिकारियों को उनकी सर्वश्रेष्ठ सेवा के लिए सम्मानित किया जाता है.

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