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जावेद आलम ब्लॉग: जरूरतमंदों की मदद करना ही है ईद की वास्तविक खुशी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 22, 2023 11:33 IST

दुनिया भर के मुसलमानों ने सदा की तरह खुशदिली व पूरी श्रद्धा के साथ रमजानुल्मुबारक का इस्तकबाल किया। हालात कैसे भी हों, रहमतों व बरकतों वाले महीने का स्वागत तो बनता है।

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ठळक मुद्देपूरे देश में 22 अप्रैल को ईद-उल-फितर मनाई जा रही है ईद के मौके पर लोग नमाज अदा कर, अपनों के साथ जश्न मना रहे हैंईद के मौके पर जरूरतमंदों की मदद से समाज में भाईचारा बढ़ता है

ईद-उल-फितर एक बार फिर बंदों तक अपने रब का इनाम पहुंचाने आ पहुंची है। एक महीने तक रमजान के रोजे रखने, तरावीह की नमाज अदा करने सहित अन्य इबादतों में रमने वालों के लिए ईद-उल-फितर को इनाम कहा गया है।

इस इनाम को पाने के लिए रोजेदार महीने भर कड़ी मशक्कत करते हैं। अलसुबह सहरी में उठना, थोड़ा-बहुत खा-पी कर फज्र की नमाज अदा करना। थोड़ी-बहुत नींद लेकर दिन भर के कामकाज, सूर्यास्त के वक्त इफ्तार और इफ्तार के बाद तरावीह की लंबी नमाज।

रमजान के पूरे महीने में रोजेदार गोया किसी मोर्चे पर होता है, जहां तरह-तरह के टास्क उसके सामने आते हैं। सांसारिक कामकाज की उलझनों से निपटने के साथ लोग रोजे-नमाज भी समय पर अदा करने के संघर्ष में लगे रहते हैं।

दुनिया भर के मुसलमानों ने सदा की तरह खुशदिली व पूरी श्रद्धा के साथ रमजानुल्मुबारक का इस्तकबाल किया। हालात कैसे भी हों, रहमतों व बरकतों वाले महीने का स्वागत तो बनता है इसलिए लंदन के मेयर ने रमजान की आमद पर खुसूसी बधाई दी तो अमेरिका के जगत प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वेयर पर रोजाना इफ्तार व नमाज होने लगी।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के रोजा इफ्तार की खबरें भी लोगों की तवज्जोह का मरकज रहीं। यह उदाहरण ऐसे देशों के हैं, जो विकसित कहलाते हैं, जो एक तरह से संसार का नेतृत्व करते हैं।

टाइम्स स्क्वेयर जैसे अति व्यस्त क्षेत्र का एक हिस्सा उनके इफ्तार, यहां तक कि तरावीह जैसी लंबी नमाज के लिए रिजर्व कर दिया जाता है। कैंब्रिज वाले इस पर खुशी जाहिर करते हैं कि वे रोजे जैसी आध्यात्मिकता से परिपूर्ण इबादत में इफ्तार कराने का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।

यह चंद मिसालें हैं और एक भी किसी मुस्लिम देश की नहीं हैं कि वहां का तो आलम ही निराला होता है। निराला आलम तो अपने देश का भी होता है। माहे-मुबारक के दौरान किसी भी मुस्लिम इलाके में चले जाइए। रौनकें व बहारें नजर आ जाएंगी।

चुनौतियों का सामना धैर्य के साथ करना है। रोजे में जिस प्रकार रब का हुक्म पूरा करने के लिए हलाल कामों (जैसे खाना-पीना व शारीरिक इच्छापूर्ति) से रुक जाते हैं, उसी तरह भड़काऊ बातों की अगंभीर प्रतिक्रिया देने से रुकना है।

रमजान में जकात के जरिये अपने कमजोर वर्ग की मदद की जाती है। जैसे रोजे में त्याग व बलिदान का फल अल्लाह तआला देता है, वैसे ही देश व दुनिया के लिए किए जाने वाले इन सद्कर्मों का फल भी मिलेगा।

आपके आसपास ही बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे जिन्हें वाकई सहायता की जरूरत है। ईद के दिन अदा की जाने वाली फितरे की रकम के लिए हकदारों को तलाश करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। इससे समाज में भाईचारे की मिसाल भी कायम होगी। 

टॅग्स :ईदत्योहारभारत
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