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संपादकीयः दुस्साहसी चीन की हिंद महासागर में बढ़ती जासूसी

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: November 14, 2022 14:38 IST

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सैन्य कमांडर सम्मेलन में कहा कि भारत ने कभी किसी देश को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की, लेकिन अगर देश के अमन-चैन को भंग करने की कोई कोशिश की जाती है, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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पिछले दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) से कहा कि चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ती अस्थिरता और अनिश्चितता का सामना कर रही है, ऐसे में हमें युद्ध लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उसके बाद भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सैन्य कमांडर सम्मेलन में कहा कि भारत ने कभी किसी देश को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की, लेकिन अगर देश के अमन-चैन को भंग करने की कोई कोशिश की जाती है, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ऐसे माहौल में हिंद महासागर में चीन के एक के बाद एक जासूसी जहाज का आना अनेक चिंताओं को जन्म देता है। हालांकि चीनी बयान उसके संपूर्ण परिप्रेक्ष्य में माना जा सकता है, वहीं भारत भी अपनी ताकत अब खुले तौर पर बताता है, किंतु जमीनी सीमाओं के बाद समुद्री सीमा पर कभी श्रीलंका और कभी इंडोनेशिया के रास्ते आकर चीन भारत के सैन्य और अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर नजर बनाए रखना चाहता है। 

अगस्त में चीन का जासूसी जहाज युआन वांग-5 श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर रुका था, जो भारत से सिर्फ 700 मील की दूरी पर था। अब चीन का नया जासूसी जहाज युआन वांग-6 हिंद महासागर में प्रवेश कर चुका है और इंडोनेशियाई प्रांत बाली के तट से गुजर कर हिंद महासागर में अपनी जगह बना रहा है। यह जहाज मिसाइल परीक्षणों और सैटेलाइट की गतिविधियों की निगरानी के लिए बना है और इसे चीनी नौसेना भेजती है। पिछले जहाज के आगमन पर भारत ने श्रीलंका सरकार के समक्ष आपत्ति जाहिर की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया था। साफ है कि चीन अपने अन्य पड़ोसी देशों की तरह भारत को भी दबाव में रखने की नीति पर चलना चाहता है। उसने ताइवान के साथ खुलेआम युद्ध की धमकी देकर आक्रामक माहौल बनाया हुआ है। इसी प्रकार भारतीय जमीनी सीमाओं पर विवाद के बहाने भारत की समुद्री सीमा पर भी दबाव बढ़ाना चाहता है। भारत के अलावा चीन के फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम, जापान, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, सिंगापुर, नेपाल, भूटान, म्यांमार, मलेशिया, ब्रुनेई, लाओस, मंगोलिया और तिब्बत जैसे करीब 17 पड़ोसी देश हैं, जिनसे उसके किसी न किसी तरह के क्षेत्रीय विवाद हैं। भारत के साथ भी स्थिति कभी अच्छी नहीं रही है। इन दिनों भारत की प्रगति और हर क्षेत्र में बढ़ती चुनौती उसकी चिंता के विषय हैं। इसी में उसे नए हथकंडे सूझ रहे हैं। किंतु अब भारत 1962 वाला नहीं रहा है। हर क्षेत्र में देश की क्षमता बढ़ चुकी है और अब वह चुनौती देने और स्वीकार करने दोनों में सक्षम है। चीन को यह बात समझ में आ रही है, लेकिन वह बार-बार दुस्साहस दिखा कर अपनी क्षमताओं का आकलन भी कर लेता है।

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