Bargi dam accident jabalpur: जबलपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी पर बना बरगी बांध इन दिनों शोक की नई-नई कथाएं सुना रहा है. जैसे-जैसे क्रूज हादसे के मृतकों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे दु:ख का वातावरण बढ़ता जा रहा है. मूल रूप से यह नर्मदा नदी पर बने 30 में से एक महत्वपूर्ण बांध है. समय के साथ-साथ बरगी बांध जबलपुर के एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हुआ है. सरकार ने यहां एक रिसॉर्ट खोला है. जिसके कारण पर्यटकों को बांध में रोमांचक मनोरंजन मिल जाता है. यहां ‘बोट राइड’, ‘फिशिंग’, ‘वाटर स्कूटर’ आदि की सुविधा प्रदान की गई है.
यह सिद्ध करता है कि केंद्र की सुख-सुविधाएं सरकार के नियंत्रण में हैं. किंतु जिस प्रकार नाव डूबी, उससे यह अनुमान लगाया नहीं जा सकता है कि बांध की नौकाओं में सुरक्षा को लेकर गंभीर इंतजाम थे. जो क्रूज हादसे का शिकार हुआ, वह वर्ष 2006 मॉडल की ‘कैटामरान’ नाव थी. जिसे तकनीकी रूप से इस तरह का बनाया जाता है कि उसके डूबने की गुंजाइश न के बराबर हो.
अब माना जा रहा है कि जब नौका बांध में चल रही थी, तभी शक्तिशाली तूफान और ऊंची लहरें आईं, जिससे क्रूज अनियंत्रित होकर पलट गया. कुछ उपलब्ध वीडियो में नाव में पानी भरता दिख रहा है. इसका अर्थ यह भी है कि नौका कहीं से टूटी या टूट रही थी. फिर यह बात सामने नहीं आई है कि 18 साल पुरानी नाव का ‘फिटनेस टेस्ट’ कब हुआ था.
सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम बना दी है, जो हर पहलू को देखेगी. हाल के दिनों में जिस किसी स्थान पर पर्याप्त मात्र में जल रहता है, वहां स्थानीय स्तर या कुछ जगह पर सरकारी स्तर पर पर्यटन केंद्र बनाने के प्रयास किए जाते हैं. इस घटना से साबित होता है कि सरकारी पर्यटन केंद्रों के पानी में चलने वाले यानों की जांच-पड़ताल की कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं थी.
इसलिए निजी स्तर पर चलने वाली नौकाओं के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है. जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है. इसी कारण आए दिन देश के अनेक भागों से लोगों के डूबने के समाचार आते रहते हैं. एक तरफ जहां केंद्र सरकार जल मार्गों के बारे में विचार कर रही है वहीं दूसरी तरफ नौबत यह है कि बांधों में भी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है.
इस स्थिति में आवश्यक यही है कि सुरक्षा के संबंध में सरकार की ओर से विधिवत नीति बनाई जाए. नियम-कायदे बनाए जाएं. उन्हीं के बाद जलयानों को चलाने की अनुमति दी जाए. तभी डूबने के हादसों पर रोक लगाई जा सकेगी. ऐसी घटनाओं के बाद जांच और रपट आने का सिलसिला अनवरत चलता रहेगा. परंतु पर्यटकों के लिए स्थान पूरी ईमानदारी के साथ बनाए गए हों तो सुरक्षा में किसी किस्म की कोताही का स्थान बाकी नहीं रहना चाहिए. तभी सरकार और प्रशासन पर आम जनमानस का भरोसा बना रहेगा.