नई दिल्लीः केंद्र ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के दायरे को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों और मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों (एनसीडी) के जोखिम कारकों की जांच को भी शामिल किया है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में संपन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में अच्छी प्रथाओं और नवाचारों पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान आरबीएसके 2.0 दिशानिर्देश जारी किए, जो प्रमुख बाल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम में एक बड़ा बदलाव है।
एक दशक से अधिक के क्रियान्वयन के आधार पर, अद्यतन ढांचा कार्यक्रम के स्थापित दृष्टिकोण - जन्मजात दोष, रोग, कमियां और विकासात्मक देरी - को व्यापक बनाता है। साथ ही व्यवहार संबंधी विकार, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों सहित उभरती हुई बाल स्वास्थ्य चिंताओं को भी शामिल करता है।
संशोधित दिशा-निर्देशों में जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए देखभाल की एक व्यापक निवारक, प्रोत्साहक और उपचारात्मक श्रृंखला शुरू की गई है, जिसमें डिजिटलीकरण और देखभाल की निरंतरता पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, उन्नत जांच ढांचे का उद्देश्य बच्चों और किशोरों को प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य स्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है। इस कार्यक्रम के तहत जांच सेवाएं सचल स्वास्थ्य दलों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में जारी रहेंगी, ताकि व्यापक पहुंच और सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्रालय ने कहा कि नये दिशा-निर्देशों का उद्देश्य समुदाय स्तर पर की गई जांच से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच और इलाज तक जाने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है। इसके लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली बनायी जाएगी, जिससे मरीज बीच में इलाज छोड़कर न जाएं और उन्हें समय-समय पर आगे की देखभाल मिलती रहे।
सरकार के डिजिटल स्वास्थ्य अभियान के तहत आरबीएसके 2.0 में डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड, वास्तविक समय का डेटा प्रणाली और एकीकृत मंच शामिल किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि ये डिजिटल नवाचार कार्यक्रम की कार्यक्षमता, जवाबदेही और तथ्यों/डेटा के आधार पर फैसले लेने में मदद करेंगे।