बिहार को हरा भरा बनाने में जीविका दीदियां निभा रही हैं अहम भूमिका, पिछले छह वर्षों में 40000000 से भी अधिक किया गया पौधरोपण

By एस पी सिन्हा | Updated: May 3, 2026 18:05 IST2026-05-03T18:04:09+5:302026-05-03T18:05:29+5:30

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार हरित जीविका, हरित बिहार कार्यक्रम के तहत पिछले छह वर्षों में एक करोड़ दीदियों ने चार करोड़ से भी अधिक पौधारोपण राज्य भर में किया है। वर्ष 2019 से 2024-25 तक राज्यभर में 987 नर्सरी विकसित किए जा चुके हैं। इनमें 677 दीदी के पौधशाला भी शामिल हैं। 

'Jeevika Didis' are playing a pivotal role in making Bihar lush green; over 40 million saplings have been planted in the last six years | बिहार को हरा भरा बनाने में जीविका दीदियां निभा रही हैं अहम भूमिका, पिछले छह वर्षों में 40000000 से भी अधिक किया गया पौधरोपण

बिहार को हरा भरा बनाने में जीविका दीदियां निभा रही हैं अहम भूमिका, पिछले छह वर्षों में 40000000 से भी अधिक किया गया पौधरोपण

Highlightsपिछले छह वर्षों में एक करोड़ दीदियों ने चार करोड़ से भी अधिक किया पौधरोपणदीदी की नर्सरी एक अनूठा उद्यम मॉडल बनकर उभरा हैवर्ष 2019 से 2024-25 तक राज्यभर में 987 नर्सरी विकसित किए जा चुके हैं

पटना: बिहार में जीविका दीदियों की मेहनत से हरियाली बढ़ रही है। इस तरह जीविका दीदियां अब पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दीदियां हरित जीविका, हरित बिहार कार्यक्रम चला रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार हरित जीविका, हरित बिहार कार्यक्रम के तहत पिछले छह वर्षों में एक करोड़ दीदियों ने चार करोड़ से भी अधिक पौधारोपण राज्य भर में किया है। वर्ष 2019 से 2024-25 तक राज्यभर में 987 नर्सरी विकसित किए जा चुके हैं। इनमें 677 दीदी के पौधशाला भी शामिल हैं। 

अधिकारियों के अनुसार जीविका के हाथों लगाए गए पौधों में 1.04 करोड़ से भी अधिक पौधे चार फीट से लंबे हैं। दीदी की नर्सरी एक अनूठा उद्यम मॉडल बनकर उभरा है, जो कम लागत में पौधरोपण को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। नर्सरी संचालक महिलाओं के लिए स्थिर और सतत आय का स्रोत तैयार हुआ है। जीविका दीदियों के हाथों संचालित नर्सरियां सामुदायिक उद्यम के रूप में कार्य रही हैं। 

इससे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आर्थिक विकास की नई राह बनी है। नर्सरी के लिए दीदियों का चयन संकुल स्तरीय संघ के माध्यम से होता है। इसमें उन्हीं दीदियों का चयन किया जाता है, जो स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हों और उनके द्वारा समूह के नियमों का ठीक ढंग से पालन करने के साथ-साथ ऋण वापसी के मामले में उनकी साख अच्छी है। इन दीदियों को टिम्बर पौधों यानी इमारती लकड़ियों के लिए तैयार होने वाले पौधे तैयार करने के लिए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से प्रशिक्षण दिया जाता है। 

साथ ही उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग के तहत सेंटर फार एक्सीलेंस, देसारी, वैशाली में फलदार वृक्ष के संरक्षण एवं देखभाल के बारे में 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है। इस तरह जीविका दीदियां बिहार को हरा भरा बनाने में भी अहम भूमिका निभाने लगी हैं। सरकार इसे एक अच्छा कदम मानकर जीविका दीदियों को प्रोत्साहित करने में जुटी है।

Web Title: 'Jeevika Didis' are playing a pivotal role in making Bihar lush green; over 40 million saplings have been planted in the last six years

भारत से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे