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अवधेश कुमार का ब्लॉग: कोरोना-लॉकडाउन ही था एकमात्र विकल्प

By अवधेश कुमार | Updated: March 28, 2020 14:31 IST

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ठळक मुद्देरोप में इतनी बुरी स्थिति इसीलिए हुई, क्योंकि जनवरी में मामला सामने आने के बावजूद वहां लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने से लेकर बचाव के अन्य कदम नहीं उठाए गए.वायरस की चेन को तोड़ना है तो सड़कों, बाजारों सबको कुछ दिनों तक के लिए खाली रखना पड़ेगा.

दुनिया की स्थिति नि:संदेह भयावह है. लगभग पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ चुकी है. इसमें प्रधानमंत्नी नरेंद्र मोदी की 21 दिनों की लॉकडाउन की घोषणा देश को इस महामारी से बचाने एवं सुरक्षित रखने का एकमात्न श्रेष्ठ विकल्प है. स्थिति ज्यादा डरावनी इसलिए है क्योंकि संक्रमितों और मृतकों की संख्या उन देशों में ज्यादा है जो विकसित व शक्ति संपन्न हैं और जिनकी स्वास्थ्य सेवाएं सर्वोत्तम मानी जाती हैं.

अमेरिकी डॉक्टर जेरोम एडम्स ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनके यहां मरने वालों में से 53 प्रतिशत की उम्र 18 से 49 साल के बीच थी. यह उस धारणा से अलग है कि ज्यादातर बुजुर्ग ही इस महामारी से अपनी जान गंवा रहे हैं. तो यह सोचना ठीक नहीं कि हम अगर जवान हैं तो हमारी मौत इससे नहीं हो सकती. पटना में कतर से आए एक 38 वर्षीय युवक की मौत हो गई. इसलिए लॉकडाउन या कर्फ्यू को जनता और देश के हित में उठाया गया कदम ही कहा जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले संबोधन में लोगों से घरों में रहने की अपील की थी और उसका असर भी हुआ. बहुमत घरों में या जहां हैं वहीं अपने को कैद रखे हुए था. हालांकि एक बड़ी संख्या बाहर निकल रही थी. वे समझ नहीं रहे थे कि वायरस की चेन को तोड़ना है तो सड़कों, बाजारों सबको कुछ दिनों तक के लिए खाली रखना पड़ेगा. चेन को तोड़ने के लिए ही पहले सारी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को प्रतिबंधित किया गया, फिर घरेलू उड़ानों को. यात्री रेलें बंद की गईं तो ज्यादातर राज्यों ने पहले अंतर्राज्यीय बसों को और फिर राज्यों के अंदर सामान्य बस संचालन को रोक दिया है. और अब पूर्ण बंदी.

यह संक्रमण पैदा होने और उसके विस्तार को रोकने के लिए अपरिहार्य हैं. इसके बाद बारी लोगों की है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों को समझाते हुए कहा कि मान लो हमारे यहां 25-30 हजार कोरोना संक्रमित हो गए तो हम कुछ नहीं कर सकते. तब लॉकडाउन करने का कोई फायदा भी नहीं होगा. सारे अस्पताल मिलकर भी इलाज नहीं कर सकते. यह पूरे भारतवर्ष पर लागू होता है. अगर राजधानी दिल्ली इसे संभालने की स्थिति में नहीं होगी तो कौन शहर और राज्य इसमें सक्षम हो सकेगा? यूरोप में इतनी बुरी स्थिति इसीलिए हुई, क्योंकि जनवरी में मामला सामने आने के बावजूद वहां लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करने से लेकर बचाव के अन्य कदम नहीं उठाए गए. नि:संदेह, लोगों को परेशानियां हो रही हैं, लेकिन अगर स्वयं को, परिवार को, देश को बचाना है तो फिर इसे सहन करने का ही विकल्प है.

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