लाइव न्यूज़ :

हर अस्पताल में क्यों न हो एक पुस्तकालय ! 

By पंकज चतुर्वेदी | Updated: September 25, 2025 07:41 IST

इसी को देखकर दिल्ली में भी छतरपुर स्थित राधास्वामी सत्संग में बनाए गए विश्व के सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर में हजारों पुस्तकों के साथ लाइब्रेरी शुरू  करने की पहल की गई थी

Open in App

तमिलनाडु के तिरुची के महात्मा गांधी मेमोरियल शासकीय चिकित्सालय के एक उपेक्षित पड़े कोने में  पुस्तकालय क्या शुरू हुआ, मरीज ही नहीं उनके साथ आने वाले तीमारदारों को भी एक ऐसा स्थान मिल गया जहां उन्हें सुकून, ज्ञान  और समय बिताने का बेहतर साधन मिल गया है. अभी वहां कुछ किताबें हैं और अंग्रेजी और तमिल के पांच अखबार और कुछ पत्रिकाएं उपलब्ध हैं. काम के बोझ से तनावग्रस्त कर्मचारी भी धीरे-धीरे इस तरफ आकर्षित हो रहे हैं. यह बात कोविड  के दौरान  प्रमाणित हो चुकी थी कि यदि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को  मनोरंजक किताबें दी जाती हैं तो उनके ठीक होने की गति बढ़ जाती है.

कोविड की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली से सटे गाजियाबाद में कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को जब एकांतवास या क्वारंटीन में रखा जाता तो वह उनके लिए किसी सजा की तरह था. मरीज भय और भ्रम के चलते बदहवास से थे. आए दिन एकांतवास केंद्रों से मरीजों के झगड़े या तनाव की खबरें आ रही थीं. तभी जिला प्रशासन ने नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से कोई 200 बच्चों की पुस्तकें वहां वितरित कर दीं.

उस समय 65 महिलाओं सहित लगभग 250 लोग कोविड-19 के सामान्य लक्षण या एहतियात के तौर पर एकांतवास शिविर में थे. रंगबिरंगी पुस्तकों ने कुछ ही दिन में उनके दिल में जगह बना ली. जहां एक-एक पल बिताना मुश्किल हो रहा था, उनका समय पंख लगाकर उड़ गया. डॉक्टर्स ने भी माना कि पुस्तकों ने क्वारंटीन किए गए लोगों को तनावरहित बनाया. इससे उनके स्वस्थ्य होने की गति भी बढ़ी. इसी को देखकर दिल्ली में भी छतरपुर स्थित राधास्वामी सत्संग में बनाए गए विश्व के सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर में हजारों पुस्तकों के साथ लाइब्रेरी शुरू  करने की पहल की गई थी. वहां भर्ती  मरीजों की रिकवरी जल्दी हुई और वे स्वस्थ व प्रसन्न दिखे.

यह कड़वा सच है कि भारत में अस्पतालों में भीड़ और अव्यवस्था का बड़ा कारण दूरदराज से आए मरीजों के साथ आए तीमारदार होते हैं. मरीज तो भीतर बिस्तर पर चिकित्साकर्मियों की निगरानी में होता है, जबकि तीमारदार बाहर खुले में बैठे, प्रतीक्षा कक्ष में मोबाइल फोन पर व्यस्त या फिर ऐसे ही किसी गैरजरूरी काम में समय काटते हैं. ऐसे लोग न केवल खुद मानसिक रूप से थकते और अव्यवस्थित हो जाते हैं बल्कि तंत्र के लिए भी दिक्कतें खड़ी करते हैं. तिरुची के अस्पताल के पुस्तकालय में ऐसे लोगों को सकारात्मक बनाए रखने का हल खोज लिया गया.

वैसे दुनिया के विकसित देशों के अस्पतालों में पुस्तकालय की व्यवस्था का अतीत सौ साल से भी पुराना है. अमेरिका में 1917 में सेना के अस्पतालों में कोई 170 पुस्तकालय स्थापित कर दिए गए थे. ब्रिटेन में सन्‌ 1919 में वार लाइब्रेरी की शुरुआत हुई. आज अधिकांश यूरोपीय देशों  के अस्पतालों में मरीजों को व्यस्त रखने, उन्हें ठीक होने का भरोसा देने के लिए उन्हें ऐसी पुस्तकें प्रदान करने की व्यवस्था है. देश के सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कालेज और बड़े समूह के निजी अस्पतालों में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा की कुछ सौ अच्छी पुस्तकें रखी जाएं तो यह नए तरीके का पुस्तकालय अभियान बन सकता है.

टॅग्स :Health and Education DepartmentHealth Department
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यफोर्टिफाइड चावल : पोषण या स्वास्थ्य पर संकट ?

स्वास्थ्यकिफायती दवाओं से आसान होता इलाज

स्वास्थ्यGlobal Mental Health Study: भारत के युवाओं में मेंटल हेल्थ का गंभीर संकट! 84 देशों की मेंटल हेल्थ स्टडी में भारतीय युवा 60वें स्थान पर

स्वास्थ्यइंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में बेड नहीं मिला?, जदयू विधायक आदित्य कुमार ने सरकार को घेरा, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा- 2400 नए बेड जल्द

स्वास्थ्यजम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ सरकार सख्त, 70 हजार लोगों की पहचान; रोकथाम के उपाय बढ़ाने की तैयारी

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यपुष्पा… नाम सुनकर फ्लावर समझे क्या? फायर है मैं…”

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यऑटिज्म : समझ और स्वीकार्यता की जरूरत

स्वास्थ्यचीनी का सेवन कम कीजिए और खाना बनाते समय तेल का प्रयोग 10 प्रतिशत तक घटाएं?, प्रधानमंत्री मोदी बोले-छोटे प्रयास करिए और मोटापे को दूर भगाएं?

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम