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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवसः जीवनरक्षक योद्धाओं का सम्मान आवश्यक

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 1, 2025 05:23 IST

National Doctor's Day: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस सामूहिक आत्ममंथन का अवसर है कि हम समाज के रूप में अपने डॉक्टरों को क्या दे रहे हैं.

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ठळक मुद्देसामाजिक संरचना के ऐसे स्तंभ हैं जो जीवन रक्षा, जनजागरूकता और स्वास्थ्य नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.प्रशासनिक दबाव और कभी-कभी अनावश्यक कानूनी कार्यवाहियां भी उनके समर्पण को प्रभावित करती हैं. एक बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराएं. यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है.

देवेंद्रराज सुथार

हर वर्ष एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है, जो न केवल डॉक्टरों की निःस्वार्थ सेवा को सम्मान देने का अवसर है, बल्कि इस पेशे की गरिमा और गंभीरता को समझने का भी दिन है. यह दिवस महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने चिकित्सा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अप्रतिम योगदान दिया. भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में डॉक्टरों की भूमिका केवल एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता तक सीमित नहीं है, वे सामाजिक संरचना के ऐसे स्तंभ हैं जो जीवन रक्षा, जनजागरूकता और स्वास्थ्य नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

डॉक्टरों का योगदान भारत में बहुआयामी रहा है. वे ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की अल्पता के बावजूद सेवाएं दे रहे हैं, महामारी जैसे कठिन समय में अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चे पर डटे रहे हैं और आयुर्वेद, होम्योपैथी, एलोपैथी जैसी विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय करते हुए कार्य कर रहे हैं.

कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी ने यह साबित किया कि डॉक्टर केवल पेशेवर नहीं, बल्कि सच्चे योद्धा हैं, जो अपने कर्तव्य को धर्म समझकर निभाते हैं. हालांकि, डॉक्टरों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. सीमित संसाधनों, अधोसंरचनात्मक कमियों, अनियमित कार्य समय और मानसिक दबाव के साथ-साथ कई बार मरीजों या उनके परिजनों द्वारा हिंसा का शिकार होना इस पेशे की एक दुखद सच्चाई है.

इसके अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों के बीच वेतन, सम्मान और कार्य स्थितियों को लेकर भी विषमता है. प्रशासनिक दबाव और कभी-कभी अनावश्यक कानूनी कार्यवाहियां भी उनके समर्पण को प्रभावित करती हैं. राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस सामूहिक आत्ममंथन का अवसर है कि हम समाज के रूप में अपने डॉक्टरों को क्या दे रहे हैं.

क्या हम उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और सहयोगी वातावरण दे पा रहे हैं? यह दिवस हमें यह सोचने पर विवश करता है कि जो लोग हमारे जीवन की रक्षा करते हैं, उनके जीवन की गुणवत्ता कैसी है? हमें डॉक्टरों को केवल एक सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता के रूप में देखना चाहिए. उनके प्रति सच्चा सम्मान तभी होगा जब हम उनके अधिकार, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की चिंता करें और उन्हें एक बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराएं. यही इस दिवस का वास्तविक संदेश है.

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