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Pravasi Bharatiya Divas: भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक हैं प्रवासी भारतीय

By देवेंद्र | Updated: January 9, 2026 05:47 IST

Pravasi Bharatiya Divas: वर्ष 2023 में एनआरआई द्वारा भारत को भेजी गई धनराशि 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जो दुनिया में सबसे अधिक थी.

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ठळक मुद्देPravasi Bharatiya Divas: भारत के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में प्रवासी भारतीयों का योगदान अतुलनीय है.Pravasi Bharatiya Divas: भारत और अन्य देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं. Pravasi Bharatiya Divas: साझेदारों में कनाडा, अमेरिका, सऊदी अरब, कतर, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश शामिल हैं.

Pravasi Bharatiya Divas: भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविधता और प्राचीन परंपराओं के लिए जाना जाने वाला देश है. आज दुनिया के 200 से अधिक देशों में बसे 6.24 करोड़ प्रवासी भारतीय न केवल अपने मूल देश की सांस्कृतिक पहचान को बचाए हुए हैं, बल्कि अपने कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त कर भारत को गौरवान्वित भी कर रहे हैं. इनमें 3.5 करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीय ऐसे हैं, जो स्थायी रूप से विदेश में बस गए हैं, लेकिन उनका अपनी मातृभूमि से जुड़ाव बरकरार है. भारत के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में प्रवासी भारतीयों का योगदान अतुलनीय है.

वे भारत और अन्य देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं. वर्ष 2023 में एनआरआई द्वारा भारत को भेजी गई धनराशि 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जो दुनिया में सबसे अधिक थी. आज भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में कनाडा, अमेरिका, सऊदी अरब, कतर, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देश शामिल हैं.

कनाडा में करीब 16 लाख एनआरआई रहते हैं, जो वहां की कुल आबादी का 3 प्रतिशत है. इसी तरह सऊदी अरब में 24.6 लाख और कतर में 8.20 लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं. ये भारतीय न केवल अपने कारोबार और व्यवसायों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि उन देशों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.

भारत सरकार ने एनआरआई के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं. इनमें प्रवासी भारतीय बीमा योजना (पीबीबीवाई) विशेष रूप से उल्लेखनीय है. यह योजना विदेशों में काम करने वाले भारतीयों को 10 लाख रुपए तक का बीमा कवर प्रदान करती है. इस योजना के तहत अब तक 80 लाख से अधिक एनआरआई लाभ प्राप्त कर चुके हैं.

अनिवासी भारतीय न केवल आर्थिक क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी भारत का नाम रोशन कर रहे हैं. भारतीय मूल के डॉक्टर, वैज्ञानिक और शिक्षाविद विभिन्न देशों में अपनी विशेषज्ञता के लिए पहचाने जाते हैं. उनके योगदान से न केवल संबंधित देशों को लाभ होता है, बल्कि भारतीय मूल की पहचान भी मजबूत होती है.

भारत ने अनिवासी भारतीयों को उनके अधिकार और सुविधाएं प्रदान करने के लिए वीजा नियमों को सरल बनाया है. अब तक 133 देशों के साथ वीजा छूट समझौते पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं और 166 देशों में ई-वीजा सुविधा उपलब्ध है. इससे अनिवासी भारतीयों के लिए भारत आना और इसके विकास में योगदान देना आसान हो गया है.

आज भारत एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के रूप में उभर रहा है. इसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था, वैश्विक मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति और तकनीकी प्रगति यह संकेत देती है कि भारत एक मजबूत भविष्य की ओर अग्रसर है. इस यात्रा में प्रवासी भारतीय समुदाय अहम भूमिका निभा रहा है. आखिरकार प्रवासी भारतीय समुदाय न केवल भारत की समृद्ध परंपरा का संरक्षक है,

बल्कि वह एक ऐसा पुल भी बना रहा है जो भारत और बाकी दुनिया के बीच संबंधों को मजबूत करता है. उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और भारत के प्रति निष्ठा ही उन्हें अद्वितीय बनाती है. भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच यह आपसी सहयोग न केवल वर्तमान में लाभकारी है, बल्कि भविष्य में दोनों के लिए समृद्धि और विकास के नए द्वार भी खोलेगा.

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