लाइव न्यूज़ :

जापान ने खींची डिजिटल अनुशासन की रेखा, 2 घंटे तक ही स्मार्टफोन उपयोग, रात के समय फोन बंद करने की गाइडलाइन

By देवेंद्र | Updated: September 1, 2025 05:04 IST

अत्यधिक उपयोग से नींद की कमी, मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.

Open in App
ठळक मुद्देप्रश्न उठता है कि क्या आधुनिक समाज, जहां स्मार्टफोन जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुका है.इस तरह की सीमा व्यावहारिक है? साथ ही क्या यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं है? परिवारों और स्कूलों के लिए संकेत है कि बच्चों में डिजिटल अनुशासन पर काम करना जरूरी है.

जापान के टोयोआके नगर ने हाल ही में एक अनोखा प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत नागरिकों को प्रतिदिन अधिकतम दो घंटे तक ही स्मार्टफोन उपयोग की सलाह दी गई है.  यह सीमा कार्य और पढ़ाई जैसे अनिवार्य कार्यों पर लागू नहीं होगी, बल्कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए है. साथ ही बच्चों और किशोरों के लिए रात के समय फोन बंद करने की गाइडलाइन भी दी गई है. यह कोई कानूनी आदेश नहीं बल्कि स्वैच्छिक नियम है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बड़ा है. यहां प्रश्न उठता है कि क्या आधुनिक समाज, जहां स्मार्टफोन जीवन का जरूरी हिस्सा बन चुका है,

वहां इस तरह की सीमा व्यावहारिक है? साथ ही क्या यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं है? इन सवालों का उत्तर आसान नहीं है. दरअसल, स्मार्टफोन आज संचार के साथ-साथ शिक्षा, मनोरंजन, कामकाज और सामाजिक जुड़ाव का अहम साधन बन चुका है. इसके अत्यधिक उपयोग से नींद की कमी, मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं.

जापान में, जहां सामूहिक अनुशासन और सामाजिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाती है, इस कदम को बच्चों और युवाओं की नींद व पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है. जापान में सामाजिक दबाव और अनुशासन का महत्व अधिक है, इसलिए इसे नैतिक आग्रह के रूप में देखा जा सकता है.

यह परिवारों और स्कूलों के लिए संकेत है कि बच्चों में डिजिटल अनुशासन पर काम करना जरूरी है. मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग तनाव, चिंता और ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ को बढ़ाता है.  इससे मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है.

ऐसे में सीमित उपयोग का यह संदेश समाज के लिए लाभकारी हो सकता है. लेकिन समाधान केवल समय-सीमा तय करने से नहीं मिलेगा, बल्कि डिजिटल साक्षरता, पारिवारिक संवाद और स्वस्थ तकनीकी आदतों से ही स्थायी समाधान संभव है. वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यूरोप, अमेरिका और चीन जैसे देशों में भी बच्चों और युवाओं के स्क्रीन-टाइम पर चिंता जताई जा रही है.

यानी यह एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति है. बहरहाल, टोयोआके का यह प्रस्ताव एक प्रयोग है. यह शायद पूर्ण समाधान न हो, लेकिन यह हमें सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं हम तकनीक के गुलाम तो नहीं बन रहे. संतुलन यदि हम खुद नहीं बनाएंगे तो समाज को ऐसे अनुशासनात्मक प्रयोग करने ही पड़ेंगे.

टॅग्स :जापानDigital
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वआखिर क्यों जापानी पत्रकार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने किया अरेस्ट?, विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा- एक रिहा, अभी भी जेल में दूसरा शख्स

कारोबारजापान, ऑस्ट्रेलिया ने कहा- नो?, 7 देशों से युद्धपोत भेजने की मांग?, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका?

विश्वकुरोसावा की राशोमन, जॉर्जेस सीमेनॉन की किताबें और नीचा नगर

भारतअभी भी खत्म नहीं हुआ है रेडियो का आकर्षण

कारोबारभारत के साथ कारोबार बढ़ाने को लेकर बेताब दुनिया

कारोबार अधिक खबरें

कारोबार16,720 करोड़ रुपये, पीएमश्री स्कूल योजना के लिए 940 करोड़, छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तकों के लिए 693 करोड़ की स्वीकृति?

कारोबार8th Pay Commission: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के तहत सैलरी में बढ़ोतरी तुरंत नहीं, अभी लगेगा समय

कारोबार143000 शिक्षामित्रों को 18000 और 24000 अनुदेशकों को मिलेंगे 17000 रुपये?, योगी सरकार पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार, छात्र-छात्राओं को 25 लाख टैबलेट

कारोबारGold Rate Today: 7 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,51,765 प्रति 10 ग्राम

कारोबारचिंताजनक स्थितिः 59 सालों में जम्मू कश्मीर की 315 झीलें गायब, 203 का क्षेत्रफल कम?, आखिर क्या है माजरा?