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जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही है भारतीय अर्थव्यवस्था, इन क्षेत्रों में बोल रहा है डंका

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: June 2, 2022 15:42 IST

चालू वित्त वर्ष 2022-23 में अधिक निर्यात, मजबूत घरेलू मांग, विनिर्माण और सर्विस सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन, ज्यादा कृषि उत्पादन, अच्छे मानसून और ग्रामीण भारत के प्रति सरकार की समर्थनकारी नीति से देश की विकास दर दुनिया की सर्वाधिक तेज विकास दर बनी रहेगी।

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31 मई को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 8.7 फीसदी रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में विकास दर में 6.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। खास बात यह है कि राजकोषीय घाटा अनुमान से भी कम, जीडीपी का 6.7 फीसदी ही रहा है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जी-20 देशों में भारत सबसे तेजगति से आर्थिक विकास करने वाला देश है और देश में अब तक का सबसे ज्यादा पूंजी निवेश हुआ है। 

यह कोई छोटी बात नहीं है कि इस समय यूक्रेन संकट के कारण जब अमेरिका और जापान सहित दुनिया की विभिन्न अर्थव्यवस्थाएं मंदी और गिरावट का सामना कर रही हैं, तब संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 6.4 फीसदी रहने का अनुमान है और भारत सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पिछले वित्त वर्ष की विकास दर 8.7 फीसदी पहुंचाने में देश से निर्यात में लगातार वृद्धि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की ऊंचाई, निजी उपयोग के साथ सरकारी पूंजीगत खर्च में इजाफा, कृषि क्षेत्र की मजबूत वृद्धि, खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार की अहम भूमिका रही है। वर्ष 2021-22 में उत्पाद निर्यात लक्ष्य से भी अधिक 419 अरब डॉलर से अधिक रहा है। 

यह कोई छोटी बात नहीं है कि वैश्विक मंदी की चुनौतियों के बीच वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोत्तरी हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के द्वारा 19 मई को जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत ने 2021-22 में 83.57 अरब डॉलर का रिकॉर्ड एफडीआई प्राप्त किया है। वर्ष 2020-21 में देश में 81.97 अरब डॉलर का एफडीआई हुआ था।

इस समय वैश्विक मंदी की चुनौतियों के बीच भी तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की अहमियत बढ़ गई है। केंद्र सरकार कृषि के विकास और किसानों को सामर्थ्यवान बनाने के लिए पिछले आठ वर्षों में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए दिखाई दी है।

अब पूरी दुनिया में भारत को खाद्यान्न का नया वैश्विक कटोरा माना जा रहा है। हाल ही में कृषि मंत्रालय के द्वारा प्रस्तुत चालू फसल वर्ष 2021-22 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 में देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.45 करोड़ टन होगा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37.7 लाख टन अधिक है। 

यद्यपि इस वर्ष गेहूं का उत्पादन 10.64 करोड़ टन होगा, जो कि पिछले साल के मुकाबले 31 लाख टन कम है, लेकिन चावल, मोटे अनाज, दलहन और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन चमकते हुए दिखाई दे रहा है। 2021-22 के दौरान चावल का कुल उत्पादन 12.97 करोड़ टन रिकॉर्ड अनुमानित है।

मोटे अनाज वाली फसलों का उत्पादन 5.07 करोड़ टन और मक्के का उत्पादन रिकार्ड 3.3 करोड़ टन रहेगा। दलहनी फसलों की पैदावार 2.78 करोड़ टन होने का अनुमान है। सरकार ने दालों के उत्पादन का लक्ष्य 2.5 करोड़ टन ही रखा था। तिलहनी फसलों की भी रिकार्ड 3.85 करोड़ टन पैदावार होगी। 

उम्मीद करें कि चालू वित्त वर्ष 2022-23 में अधिक निर्यात, मजबूत घरेलू मांग, विनिर्माण और सर्विस सेक्टर के अच्छे प्रदर्शन, ज्यादा कृषि उत्पादन, अच्छे मानसून और ग्रामीण भारत के प्रति सरकार की समर्थनकारी नीति से देश की विकास दर दुनिया की सर्वाधिक तेज विकास दर बनी रहेगी।

टॅग्स :भारतइकॉनोमीएफडीआई
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