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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया बजट

By भरत झुनझुनवाला | Updated: February 2, 2021 10:47 IST

बजट-2021 में सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। हालांकि, कई ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां सरकार को और ध्यान देने की जरूरत है। रोजगार सृजन इनमें से एक अहम मुद्दा है।

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ठळक मुद्देइस बार के बजट में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख मुद्दा गायब रहास्वास्थ्य की बात करें तो सरकार को भारतीय जड़ी-बूटियों के रोग रोधक गुणों पर रिसर्च बढ़ाने की जरूरत

इस बजट में कई सार्थक कदम उठाए गए हैं. पहला यह कि बुनियादी संरचना- जैसे शहरों की मेट्रो में निवेश बढ़ाया गया है, दूसरा यह कि सरकारी उपक्रमों जैसे एयर इंडिया, शिपिंग कॉर्पोरेशन, आईडीबीआई बैंक, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड और दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण का भी लक्ष्य रखा गया है. 

इस मद से 1.75 करोड़ की रकम अर्जित करने का अगले वर्ष का लक्ष्य है. तीसरे, प्राइवेट कंपनियों का बिजली के वितरण के लिए आह्वान किया गया है जिससे कि उपभोक्ता को राज्य बिजली बोर्डो की अकुशलता एवं भ्रष्टाचार से छुट्टी मिल सके. 

'रोजगार पर बजट असफल'

सार्थक कदमों के बाद लेकिन जो प्रमुख समस्या नौजवानों के रोजगार की है उस पर यह बजट सफल नहीं है. जब युवकों को रोजगार मिलता है तो उनके हाथों में क्रयशक्ति आती है जिससे बाजार में मांग बनती है. लेकिन इस बजट में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख मुद्दा गायब है. इसलिए यह बजट आशा से बहुत पीछे है.

पहला मुद्दा कृषि का है. वित्त मंत्री ने सही बताया है कि वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2019-20 यानी बीते वर्ष में समर्थन मूल्य के अंतर्गत किसानों को लगभग डेढ़ गुना रकम अदा की गई है. लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि इसी अवधि में महंगाई में लगभग 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 

इसलिए किसानों को समर्थन मूल्य के अंतर्गत दी गई रकम में वास्तविक वृद्धि 6 वर्षो में मात्र 19 प्रतिशत की हुई है. यह न्यून वृद्धि किसानों की आय दूना करने के लिए पूरी तरह अपर्याप्त है. 

यह भी देखने की बात है कि इस वृद्धि में किसान की लागत में कितनी वृद्धि हुई है. यह भी वित्त मंत्री ने नहीं बताया है इसलिए किसान की आय में शुद्ध वृद्धि बहुत कम ही दिखती है.

जड़ी-बूटियों के रोग रोधक गुणों पर रिसर्च की जरूरत

दूसरा विषय स्वास्थ्य का है. सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपए वैक्सीन के निर्माण के लिए और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए आने वाले पांच वर्षो में 2.87 लाख करोड़ की रकम को आवंटित किया है जो कि सही दिशा में है. 

हम लेकिन कोविड का सामना करने में वैक्सीन के भरोसे सफल नहीं हुए हैं. हम सफल हुए हैं अपनी जीवनशैली और गंगाजल, हल्दी, गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, अदरक आदि जड़ी बूटियों के सेवन से. इसलिए जरूरत थी कि सरकार इन जड़ी-बूटियों के रोग रोधक गुणों पर रिसर्च करके इनका वैश्वीकरण कराती.

तीसरा प्रमुख क्षेत्र शिक्षा का है. अपने देश में भारी संख्या बल श्रम बाजार में प्रवेश करने को है. रोजगार न मिलने की स्थिति में ये लोग आपराधिक गतिविधियों में संलग्न हो सकते हैं. 

तमाम शोधकर्ताओं का मानना है कि हम मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में रोजगार उत्पन्न नहीं कर पाएंगे क्योंकि इस क्षेत्र में दिनोंदिन रोबोट का उपयोग बढ़ रहा है और रोजगार कम ही उत्पन्न हो रहे हैं. हमें बढ़ना था सेवा क्षेत्र में. 

इस दिशा में वित्त मंत्री ने देश की प्रमुख भाषाओं में देश के सरकारी दस्तावेज का अनुवाद करके जनता में उपलब्ध करने का सही कदम उठाया है. लेकिन इसी को बहुत आगे ले जाने की जरूरत थी. 

सरकार को चाहिए था कि भारतीय युवाओं में विदेशी भाषाओं में अनुवाद करने की क्षमता विकसित करने के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था करती. सेवा क्षेत्र में ऑनलाइन ट्यूशन, ऑनलाइन मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे तमाम अवसर खुल रहे हैं. इनके लिए युवाओं को ट्रेंड करने के लिए कदम उठाने थे जो बजट में नहीं उठाए गए हैं.

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