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सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- डीलरों के नहीं बिके हुए BS-4 वाहनों के लिए हम क्यों जारी करें आदेश, समय सीमा के बारे में सबको थी जानकारी

By रजनीश | Updated: July 25, 2020 10:07 IST

सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई को अपने 27 मार्च के आदेश को याद दिलाया था, जिसमें न्यायालय ने कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन के हटने पर दिल्ली-एनसीआर को छोड़ कर समूचे भारत में 10 दिनों के लिये BS-4 वाहनों की बिक्री की अनुमति दी थी।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन वाहनों के लिए रकम ले ली गई है लेकिन उन्हें बेचा न गया हो तो वह वाहन डीलर का माना जाएगा और खरीददार के पैसे वापस करने होंगे।पीठ ने कहा, हमने लॉकडाउन को देखते हुए 31 मार्च के बाद बिक्री की इजाजत दी थी लेकिन जो आंकड़े हमारे पास आए हैं वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की बिक्री बिना लॉकडाउन की अवधि के मुकाबले अधिक हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के उस मौखिक अनुरोध पर नाखुशी जताई, जिसमें कहा गया है कि डीलरों को नहीं बिके हुए बीएस-4 वाहन उसके विनिर्माताओं को वापस करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि उन्हें अन्य देशों को निर्यात किया जा सके। एसोसिएशन के वकील ने न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि ऐसे कुछ देश हैं जहां BS-4 वाहनों की बिक्री की अनुमति है। हालांकि, पीठ ने कहा, ‘‘हमें इसके लिये आदेश क्यों जारी करना चाहिए? विनिर्माता समय सीमा से अवगत हैं।सुप्रीम कोर्ट ने नरमी दिखाते हुए 31 मार्च के बाद वाहन पोर्टल पर BS-4 वाहनों को अपलोड करने से संबंधित जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार को और समय दे दिया है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वाहनों की बिक्री की इजाजत देने संबंधी याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, हम ऐसे वाहनों को वापस लेने का आदेश क्यों पारित करे? निर्माताओं को इसकी समयसीमा के बारे में पता था, तो उन्हें इसे वापस लेना चाहिए।

अब पीठ ने सरकार को हलफनामा दायर करने के लिए और वक्त देते हुए सुनवाई 31 जुलाई तक स्थगित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (FADA) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने पीठ से कहा, वाहन डीलर्स के पास अभी भी ऐसे BS-4 वाहन पड़े हुए हैं, जिनकी बिक्री नहीं हुई। लिहाजा उन वाहनों को निर्माताओं को वापस करने की अनुमति दी जाए, ताकि निर्माता उन वाहनों को दूसरे देश में निर्यात कर सकें। 

उन्होंने बताया कि अफ्रीका के कई देश अभी भी BS-4 वाहनों की बिक्री की इजाजत देते हैं। इस पर पीठ ने कहा, हम इसके लिए आदेश क्यों पारित करें। वाहन निर्माताओं को बीएस-4 वाहनों की बिक्री की डेडलाइन के बारे में मालूम था। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि कोरोना के कारण देशभर में किए गए लॉकडाउन के दौरान वाहनों की इतनी बिक्री कैसे हुई? कहीं ये लेनदेन बैक डेटेड तो नहीं है?   सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि 25 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन लागू था, ऐसे में इस दौरान BS-4 वाहनों की बिक्री कैसे हुई। इसी वजह से कोर्ट ने अपने 27 मार्च के उस आदेश को वापस ले लिया था जिसमें लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिनों तक बचे हुए 4-4 वाहनों को बिक्री की अनुमति दी गई थी।

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, दो रास्ते नहीं हो सकते कि लॉकडाउन के दौरान भी गाड़ी बेची जाए और लॉकडाउन खत्म होने के 10 दिन का ग्रेस पीरियड भी मिले। ये अदालत के आदेश की भावनाओं के खिलाफ होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन वाहनों के लिए रकम ले ली गई है लेकिन उन्हें बेचा न गया हो तो वह वाहन डीलर का माना जाएगा और खरीददार के पैसे वापस करने होंगे। पीठ ने कहा, हमने लॉकडाउन को देखते हुए 31 मार्च के बाद बिक्री की इजाजत दी थी लेकिन जो आंकड़े हमारे पास आए हैं वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की बिक्री बिना लॉकडाउन की अवधि के मुकाबले अधिक हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई को अपने 27 मार्च के आदेश को याद दिलाया था, जिसमें न्यायालय ने कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन के हटने पर दिल्ली-एनसीआर को छोड़ कर समूचे भारत में 10 दिनों के लिये BS-4 वाहनों की बिक्री की अनुमति दी थी। अक्टूबर 2018 में शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि 1 अप्रैल 2020 के बाद भारत में किसी भी BS-4 वाहन की न तो बिक्री की जाएगी, ना ही पंजीकरण होगा। 

शुक्रवार की सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र को इस साल 31 मार्च तक बिके बीएस-4 वाहनों के बारे में आंकड़े पेश करने के लिये और वक्त दे दिया। न्यायालय अगली सुनवाई 31 जुलाई को करेगा।

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