औरंगाबाद निवासी श्रीमती नरेंद्र कौर छाबड़ा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हिंदी लेखिका हैं. आपकी कहानियां, लघु कथाएं, लेख, कविताएं आदि देश के सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं. आपके अनेक कहानी संकलन भी प्रकाशित हो चुके हैं.Read More
इसी दिन सिखों के दसवें गुरुगुरुगोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. प्रकृति का नियम है जब किसी जुल्म, अत्याचार, अन्याय की पराकाष्ठा होती है तो उसे हल करने के लिए कोई कारण भी बन जाता है. जब मुगल शासक औरंगजेब द्वारा अत्याचार, अन्याय की हर सीमा ...
बेशक कोरोना ने संसार भर को हिलाकर रख दिया है, फिर भी इन विकट परिस्थितियों में स्वयं को स्थिर, सहज और तनावमुक्त रखने की कोशिश जारी रखी जा सकती हैं, जिसका स्नेत है सकारात्मक सोच तथा आध्यात्मिकता. हमारे देश की संस्कृति में तो आध्यात्मिकता कूट-कूट कर समा ...
भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत सम्मान दिया गया है. कहा गया है कि जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं. जिस प्रकार कोई भी पक्षी एक पंख से नहीं उड़ सकता, उसी प्रकार कोई भी देश या समाज स्त्री या पुरुष दोनों में से किसी एक वर्ग द्वारा उन ...
अगर इस दिन को केवल प्रेम के रूप में देखें, इस पर विचार करें तो हम पाएंगे कि प्रेम में अनेक शक्तियां हैं. प्रेम एक सुगंध है जो मन को प्रसन्न रखती है. प्रेम एक मिठास है जिसका जितना स्वाद लो वह बढ़ता ही जाता है. प्रेम इंद्रधनुष है जो संसार के प्राणियों ...
इसी दिन ज्ञान व विद्या की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था. मान्यता है कि इस दिन अगर कोई छात्र मां सरस्वती की आराधना करता है तो उसे मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त हो जाती है. ...
गुरु गोबिंद सिंहजी समग्र मानवता के कवि थे. उनकी कविता में ज्ञान, भक्ति, सेवाभाव, वीरधर्म, प्रेम, प्रकृति और मानव सौंदर्य सभी को स्थान प्राप्त है. वे भक्त भी थे बादशाह भी थे. संत भी थे, योद्धा भी थे. कवि भी थे, परदु:ख कातर भी थे. उनका दृढ़ विश्वास था क ...
आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंहजी के शूरवीर और मुगल सेना के बीच कई माह से घमासान युद्ध जारी था. ऐसे में औरंगजेब ने गुरुजी को पत्र लिखा कि यदि आप आनंदपुर का किला खाली कर दें तो आपको बिना किसी रोक-टोक के यहां से जाने दिया जाएगा. ...