लाइव न्यूज़ :

तालिबान की वापसी, महिलाओं के लिए 20 साल की प्रगति रातों-रात गायब होती दिख रही है

By भाषा | Updated: August 18, 2021 14:03 IST

Open in App

अजदाह राज मोहम्मद, पीएचडी छात्र, मेलबर्न विश्वविद्यालय; और जेना सैपियानो, लेक्चरर, मोनाश जेंडर पीस एंड सिक्योरिटी सेंटर, मोनाश यूनिवर्सिटी मेलबर्न, 18 अगस्त (द कन्वरसेशन) तालिबान जैसे जैसे अफगानिस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है, देश एक बार फिर महिलाओं के लिए एक बेहद खतरनाक जगह में तब्दील होता जा रहा है। रविवार को काबुल के पतन से पहले ही, स्थिति तेजी से बिगड़ रही थी, सभी विदेशी सैन्य कर्मियों की नियोजित वापसी और अंतरराष्ट्रीय सहायता में गिरावट के कारण स्थिति और खराब हो गई थी।पिछले कुछ हफ्तों में ही, हिंसा और उनमें हताहत होने वालों की कई खबरें आई हैं। इस बीच, सैकड़ों हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर भाग गए हैं। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि मई के अंत से जो लोग भाग गए हैं उनमें से लगभग 80% महिलाएं और बच्चे हैं।तालिबान की वापसी महिलाओं और लड़कियों के लिए क्या मायने रखती है?तालिबान का इतिहासइस्लामिक कानून की सख्त व्याख्या के बाद कठोर परिस्थितियों और नियमों को लागू करते हुए तालिबान ने 1996 में अफगानिस्तान पर नियंत्रण किया था।उनके शासन में, महिलाओं को खुद को ढंकना होता था और उन्हें किसी पुरुष संरक्षक के साथ ही घर से बाहर जाने की इजाजत थी। तालिबान ने लड़कियों के स्कूल जाने और महिलाओं के घर से बाहर काम करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। उन्हें वोट देने पर भी रोक लगा दी गई थी। महिलाओं को इन नियमों का उल्लंघन करने पर क्रूर दंड दिया जाता था, जिसमें व्यभिचार का दोषी पाए जाने पर पीटना, कोड़े मारना और संगसार अर्थात पत्थर मारकर हत्या करना शामिल था। उस समय अफगानिस्तान में दुनिया में सबसे ज्यादा मातृ मृत्यु दर थी।पिछले 20 साल2001 में तालिबान के पतन के साथ, महिलाओं और लड़कियों की स्थिति में काफी सुधार हुआ, हालांकि ये लाभ आंशिक और नाजुक थे।महिलाएं अब राजदूत, मंत्री, राज्यपाल और पुलिस और सुरक्षा बल के सदस्यों के रूप में पदों पर हैं। 2003 में, नई सरकार ने महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन की पुष्टि की, जिसके लिए राज्यों से अपने स्थानीय कानून में लैंगिक समानता को शामिल करने के लिए कहा गया।2004 के अफगान संविधान में कहा गया है कि ‘‘अफगानिस्तान के नागरिकों, पुरुष और महिला, के कानून के समक्ष समान अधिकार और कर्तव्य हैं’’। इस बीच, महिलाओं को जबरन और कम उम्र में शादी और हिंसा से बचाने के लिए 2009 का एक कानून पेश किया गया ।ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, कानून के बाद महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसक अपराधों की सूचना देने, जांच और कुछ हद तक दोषसिद्धि में वृद्धि देखी गई।एक समय देश में स्कूलों में लड़कियों की संख्या लगभग नहीं के बराबर थी, जो आज हज़ारों में है, प्रगति धीमी और अस्थिर रही है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार 37 लाख अफगान बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, जिनमें से लगभग 60% लड़कियां हैं।काले दिनों की वापसीतालिबान नेताओं ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वे महिलाओं के अधिकारों को ‘‘इस्लाम के अनुसार’’ देना चाहते हैं। लेकिन अफगानिस्तान में महिला नेताओं सहित, सभी इसे बहुत संदेह से देख रहे हैं। दरअसल, तालिबान ने हर संकेत दिया है कि वे अपने दमनकारी शासन को फिर से लागू करेंगे।जुलाई में, संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि वर्ष के पहले छह महीनों में मारी गई और घायल महिलाओं और लड़कियों की संख्या एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई।तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में फिर से लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता प्रतिबंधित कर दी गई है। जबरन शादी करने की भी खबरें आई हैं।महिलाएं फिर से बुर्का पहन रही हैं और तालिबान से खुद को बचाने के लिए अपनी शिक्षा और घर से बाहर के जीवन के सबूत नष्ट करने की बात कर रही हैं।जैसा कि एक गुमनाम अफगान महिला द गार्जियन में लिखती है: ‘‘मुझे उम्मीद नहीं थी कि हम फिर से अपने सभी मूल अधिकारों से वंचित हो जाएंगे और 20 साल पीछे चले जाएंगे। अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए 20 साल तक संघर्ष करने के बाद अब हम एक बार फिर बुर्के और अपनी पहचान छिपाने के उपाय ढूंढ रहे हैं। कई अफ़ग़ान तालिबान की वापसी से नाराज़ हैं और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया हैं। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। अवज्ञा के दुर्लभ प्रदर्शन में महिलाओं ने बंदूकें भी उठा ली हैं।लेकिन महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं होगा।दुनिया दूसरी तरह देखती है वर्तमान में, अमेरिका और उसके सहयोगी अपने नागरिकों और कर्मचारियों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए व्यापक बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। लेकिन अफगान नागरिकों और उनके भविष्य का क्या? अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन तालिबान की प्रगति और बिगड़ते मानवीय संकट से काफी हद तक अप्रभावित हैं। 14 अगस्त के एक बयान में, उन्होंने कहा: ‘‘दूसरे देश के नागरिक संघर्ष में एक अंतहीन अमेरिकी उपस्थिति मुझे स्वीकार्य नहीं थी।’’ऐसा तब है जब कि अमेरिका और उसके सहयोगी - ऑस्ट्रेलिया सहित - तालिबान को हटाने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के नाम पर 20 साल पहले अफगानिस्तान गए थे। हालांकि, अधिकांश अफगान यह नहीं मानते कि उन्होंने अपने जीवनकाल में शांति का अनुभव किया है।जैसा कि तालिबान ने देश पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया है, यदि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक बार फिर से अफगानिस्तान को छोड़ देता है तो पिछले 20 वर्षों की उपलब्धियां, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों और समानता की रक्षा के लिए की गई उपलब्धियां, जोखिम में हैं तालिबान के आगे बढ़ने पर महिलाएं और लड़कियां मदद की गुहार लगा रही हैं। हमें उम्मीद है कि दुनिया सुनेगी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

विश्वPakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान के अस्पताल पर हमले से भड़के अफगान क्रिकेटर, काबुल में अब तक 400 लोगों की मौत, कई घायल

विश्वPakistan-Afghanistan War: 'अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान किया जाए', भारत ने पाकिस्तान को चेताया

विश्वPakistan-Afghanistan Tension: पाकिस्तान ने काबुल से लेकर कंधार तक की एयरस्ट्राइक, 4 की मौत; तालिबान ने जवाबी कार्रवाई की दी धमकी

विश्वअफगानिस्तान के बगराम वायुसेना अड्डे पर हमला, टीटीए कमांडर कहरमान को पाकिस्तान ने मार गिराया

विश्व अधिक खबरें

विश्वUS-Israel-Iran War: ट्रंप का दावा- "तेहरान हमले में ईरानी सैन्य नेता ढेर", IDF ने हिज्बुल्लाह और ईरान के 200 से ज्यादा ठिकानों को बनाया निशाना

विश्ववैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल के बाहर 45 पृथ्वी जैसे ग्रहों को खोज निकाला

विश्वकर्ज़ में डूबे पाकिस्तान के लिए भारी मुसीबत, यूएई ने इसी महीने 3.5 अरब डॉलर का लोन चुकाने को कहा

विश्वअसल समस्या ट्रम्प हैं या दुनिया का दरोगा बनने की अमेरिकी मनोदशा?

विश्वअबू धाबी में रोकी गई ईरानी मिसाइलों के मलबे की चपेट में आने से घायल 12 लोगों में 5 भारतीय शामिल