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टीका लगाने के लिए लोगों को भुगतान करना कारगर तरकीब हो सकती है पर इसकी नैतिकता को लेकर बहस

By भाषा | Updated: May 20, 2021 12:41 IST

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(क्रिस्टोफर रॉबर्टसन, बोस्टन यूनिवर्सिटी)

मैसाचुसेट्स (अमेरिका), 20 मई (द कन्वर्सेशन) टीका लगवाने को लेकर असमंजस में पड़े लोगों को प्रोत्साहन राशि देना संभवत: कारगर तरकीब साबित हो सकती है।

ओहियो के रिपब्लिकन गवर्नर माइक डिवाइन ने टीका लगवाने वालों के लिए 12 मई, 2021 को 10-10 लाख डॉलर के पांच लॉटरी इनाम घोषित किए। इस बीच, पश्चिम वर्जीनिया में, युवा नागरिकों को टीका लेने वालों को 100 डॉलर के बचत बॉन्ड देने का प्रलोभन दिया गया और नॉर्थ कैरोलिना में सरकारी विश्वविद्यालय ने टीका लगवाने वाले विद्यार्थियों को एक घर खरीदने में लगने वाली राशि जीतने का अवसर देने की पेशकश की है। कई कंपनियां भी टीका लगवा चुके कर्मचारियों को बोनस या अतिरिक्त छुट्टियां देने के जरिए अधिक पैसा दे रही हैं।

ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगवाने के ये प्रयास सराहनीय तो हैं ही साथ ही कामयाब तरकीबें भी हो सकते हैं। लेकिन व्यवहार का अध्ययन करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर लोग टीकों को लेकर और संशय पैदा कर लें तो लोगों को टीका लगवाने के लिए भुगतान करना उलटा दांव भी साबित हो सकता है। नीतिशास्त्रियों का तर्क है कि यह गलत होगा। उन्होंने इसकी निष्पक्षता एवं समानता को लेकर चिंताओं का हवाला दिया है।

व्यवहार वैज्ञानिक एवं नीतिशास्त्र के तौर पर लेख के लेखक ने इन प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कई शोधों की मदद ली है। इनमें बताया गया है कि प्रोत्साहनों से जिंदगियां बचाने में मदद मिल सकती है और अगर इसका ढांचा सही तरीके से बनाया जाए तो इसे व्यक्तिगत अधिकारों का हनन नहीं होगा या सरकार के लिए यह बड़ा खर्च नहीं होगा।

अमेरिका में, स्वास्थ्य देखभाल में प्रोत्साहनों एवं हतोत्साहन पहले से ही प्रचलित हैं। निजी स्वास्थ्य बीमा की अमेरिकी व्यवस्था रोगियों को पर्याप्त कटौतियों एवं कुछ हिस्सों का स्वयं भुगतान करने का भी जोखिम बताती है। इससे न सिर्फ खर्च निकाला जाता है बल्कि स्वास्थ्य सेवा की बर्बादी को भी रोका जाता है।

इसका मतलब यह हुआ कि मरीजों को ज्यादा नियमित तौर पर डॉक्टर के पास न जाने और आपातकालीन सुविधाओं का लाभ कम से कम लेने के प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि इन दोनों ही सूरत में कुछ न कुछ खर्च उन्हें भी करना पड़ता है।

कोविड-19 के मामले में, टीके पहले से ही उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त हैं जिसने कई लोगों को नि:संदेह टीका लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया है। अध्ययनों ने दर्शाया है जेब से न जाने वाले खर्च को कम करने से लोग ज्यादा परहेज करते हैं। दवाएं लेने के लिए भुगतान करने से लागत और कम की जा सकती है। और अगर सही तरीके से रूपरेखा दी जाए तो ऐसे प्रोत्साहन स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार को बदल सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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