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Nobel Prize 2020: 'हेपेटाइटिस सी' वायरस की खोज, चिकित्सा में तीन वैज्ञानिकों को नोबेल

By सतीश कुमार सिंह | Updated: October 5, 2020 18:15 IST

अमेरिका के हार्वे जे अल्टर, चार्ल्स एम राइस और ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल ह्यूटन को यह पुरस्कार मिला है। नोबेल कमेटी के प्रमुख थॉमस पर्लमैन ने स्टॉकहोम में विजेताओं के नाम की घोषणा की।

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ठळक मुद्देनोबेल पुरस्कार समिति के मुताबिक रक्त जनित हेपेटाइटिस विश्वभर में लोगों में सिरोसिस और यकृत कैंसर का कारण बनता है।हेपटाइटिस से लड़ाई में योगदान देने के लिए तीनों वैज्ञानिकों को द‍िया गया है। तीनों ही वैज्ञानिकों ने एक नोवल वायरस की खोज में मूलभूत खोज की जिससे हेपटाइटिस सी की पहचान हो सकी।

स्‍टॉकहोमः वर्ष 2020 के चिकित्सा नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। इस बार तीन वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से ये पुरस्कार दिया जाएगा। इन वैज्ञानिकों को हेपेटाइटिस-सी वायरस की खोज के लिए दिया गया है।

अमेरिका के हार्वे जे अल्टर, चार्ल्स एम राइस और ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल ह्यूटन को यह पुरस्कार मिला है। नोबेल कमेटी के प्रमुख थॉमस पर्लमैन ने स्टॉकहोम में विजेताओं के नाम की घोषणा की। नोबेल पुरस्कार समिति के मुताबिक रक्त जनित हेपेटाइटिस विश्वभर में लोगों में सिरोसिस और यकृत कैंसर का कारण बनता है।

इन वैज्ञानिकों को करीब 11 लाख 20 हजार डॉलर की धनराशि दी जाएगी। नोबेल पुरस्‍कार देने वाली संस्‍था ने कहा कि इस साल यह पुरस्‍कार खून से पैदा होने वाले हेपटाइटिस से लड़ाई में योगदान देने के लिए तीनों वैज्ञानिकों को द‍िया गया है। संस्‍था ने कहा कि इस हेपटाइटिस से दुनियाभर में बड़ी संख्‍या में लोगों को सिरोसिस और लीवर कैंसर होता है। तीनों ही वैज्ञानिकों ने एक नोवल वायरस की खोज में मूलभूत खोज की जिससे हेपटाइटिस सी की पहचान हो सकी।

व्याख्या करने में मदद मिली जो हेपेटाइटिस ए और बी बिषाणुओं द्वारा नहीं की जा सकी थी

अमेरिकी वैज्ञानिक हार्वे जे आल्टर और चार्ल्स एम राइस तथा ब्रिटिश विज्ञानी माइकल हफटन को हेपेटाइटिस सी वायरस की खोज के लिए सोमवार को चिकित्सा के क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। नोबेल पुरस्कार समिति ने सोमवार को स्टाकहोम में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि तीनों वैज्ञानिकों के अनुसंधान से रक्त से होने वाले हेपेटाइटिस संक्रमण के प्रमुख स्रोत की व्याख्या करने में मदद मिली जो हेपेटाइटिस ए और बी बिषाणुओं द्वारा नहीं की जा सकी थी।

समिति ने कहा कि उनके अनुसंधान कार्य से रक्त की जांच और नयी दवाओं की खोज में मदद मिल सकी जिससे लाखों लोगों की जान बच सकी। नोबेल समिति के अनुसार, ‘‘उनकी खोज का परिणाम है कि आज वायरस के लिए अत्यंत सटीक परिणाम देने वाली खून जांच उपलब्ध है और इससे दुनियाभर के अनेक हिस्सों में रक्त चढ़ाने के कारण हेपेटाइटिस संक्रमण को रोका जा सकता है और वैश्विक रूप से स्वास्थ्य संबंधी व्यापक सुधार हुआ है।’’

उसने कहा, ‘‘उनकी खोज से हेपेटाइटिस सी के लिए एंटीवायरल दवा के त्वरित विकास की दिशा में भी काम हुआ है। इतिहास में पहली बार अब रोग का उपचार किया जा सकता है जिससे दुनियाभर से हेपेटाइटिस सी वायरस के उन्मूलन की उम्मीदें बढ़ी हैं।’’ विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार दुनियाभर में हेपेटाइिटस के सात करोड़ से अधिक मामले हैं और हर साल इससे चार लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है। यह बीमारी गंभीर है और इससे यकृत संबंधी समस्या और कैंसर तक होने की आशंका होती है।

पुरस्कार की शुरुआत 124 साल पहले स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने की थी

प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार में स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनोर (11,18,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक) की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। पुरस्कार की शुरुआत 124 साल पहले स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने की थी। इस साल चिकित्सा क्षेत्र के पुरस्कार का विशेष महत्व है जहां कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनियाभर के समाजों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिकित्सा अनुसंधान की अहमियत रेखांकित हुई है। इसके अलावा हर वर्ष भौतिकी, रसायनशास्त्र, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।

नोबेल पुरस्‍कार देने वाली संस्‍था के मुताबिक इसी हफ्ते फ‍िजिक्‍स, केमिस्‍टी, साहित्‍य और शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कारों की घोषणा की जाएगी। वहीं अर्थशास्‍त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कारों की घोषणा अगले सोमवार को की जाएगी। बता दें कि इस बार शांति के नोबेल पुरस्‍कारों की दौड़ में अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी हैं। उन्‍हें इजरायल और यूएई के बीच शांति डील कराने के लिए नामित किया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का आकलन है कि दुनिया में 70 मिलियन हेपेटाइटिस के केस हैं, और हर साल इस बीमारी की वजह से दुनिया में 4 लाख लोगों की मौत होती है। इस रोग को क्रॉनिक बीमारी की श्रेणी में रखा जाता है और लीवर से जुड़ी बीमारियों और कैंसर का प्रमुख कारण है।

टॅग्स :नोबेल पुरस्कारअमेरिकाब्रिटेनसंयुक्त राष्ट्रवर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन
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