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'1860 से पहले हमारा हिस्सा था व्लादिवोस्तोक शहर', अब रूस के शहर पर चीन का दावा

By स्वाति सिंह | Updated: July 2, 2020 20:50 IST

अब सिवई ने दावा किया कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर 1860 से पहले चीन का हिस्सा था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस शहर को पहले हैशेनवाई के नाम से जाना जाता था जिसे रूस से एकतरफा संधि के तहत चीन से छीन लिया था। 

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ठळक मुद्देभारत से विवाद के बाद अब चीन ने रूस के एक शहर पर अपना दावा ठोका है।सीजीटीएन के संपादक शेन सिवई ने रूस के व्लादिवोस्तोक शहर को अपना बताया है।

बीजिंग: भारत से विवाद के बाद अब चीन ने रूस के एक शहर पर अपना दावा ठोका है। दरअसल, चीन के सरकारी समाचार चैनल सीजीटीएन के संपादक शेन सिवई ने रूस के व्लादिवोस्तोक शहर को अपना बताया है। बता दें कि गलवान घाटी में भारत के साथ गतिरोध के बीच पूरी दुनिया में चीन की आलोचना हो रही है। वहीं, पिछले दिनों चीन ने भूटान के अभयारण्य पर अपना दावा पेश किया था। भूटान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी।

वहीं अब सिवई ने दावा किया कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर 1860 से पहले चीन का हिस्सा था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस शहर को पहले हैशेनवाई के नाम से जाना जाता था जिसे रूस से एकतरफा संधि के तहत चीन से छीन लिया था। 

बीते दिनों रूस ने चीन की खुफिया एजेंसी पर पनडुब्बी से जुड़ी टॉप सीक्रेट फाइल चुराने का आरोप लगाया था। इस मामले में रूस ने अपने एक नागरिक को गिरफ्तार भी किया था। जिस पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। आरोपी रूस की सरकार के बड़े पद पर था जिसने इस फाइल को चीन को सौंपा था। 

NBT में छपी में खबर के मुताबिक, चीन के सभी मीडिया संगठन हैं सभी सरकारी हैं। इसमें बैठे लोग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इशारे पर ही कुछ भी लिखते और बोलते हैं। कहा जाता है कि चीनी मीडिया में लिखी गई कोई भी बात वहां के सरकार के सोच को दर्शाती है। ऐसी स्थिति में शेन सिवई का ट्वीट अहम हो जाता है। हाल के दिनों में रूस के साथ चीन के संबंधों में खटास भी आई है।

रूस का अहम हिस्सा है व्लादिवोस्तोक

मालूम हो कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर प्रशांत महासागर में तैनात उसके बेड़े का प्रमुख बेस है। रूस के उत्तर पूर्व में स्थित यह शहर प्रिमोर्स्की क्राय राज्य की राजधानी है। यह शहर चीन और उत्तर कोरिया की सीमा के नजदीक स्थित है। व्यापारिक और ऐतिहासिक रूप से व्लादिवोस्तोक रूस का सबसे अहम शहर है। रूस से होने वाले व्यापार का अधिकांश हिस्सा इसी पोर्ट से होकर जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध में भी यहां जर्मनी और रूस की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध लड़ा गया था।

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