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अफगानिस्तान: विश्वविद्यालयों में अब नहीं पढ़ सकेंगी लड़कियां और महिलाएं, तालिबान सरकार ने लगाया प्रतिबंध

By आजाद खान | Updated: December 21, 2022 07:47 IST

तालिबान सरकार के फरमान के अनुसार, निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को प्रतिबंध जल्द से जल्द लागू करने और बैन लगाने के बाद मंत्रालय को सूचित करने को कहा गया है।

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ठळक मुद्दे अफगानिस्तान में तालिबान ने एक नया फरमान जारी किया है। तालिबान सरकार ने लड़कियों और महिलाओं के विश्वविद्यालयों में पढ़ने पर बैन लगा दिया है। आपको बता दें कि कुछ महीने पहले ही इन लोगों ने विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित एक एडमिशन टेस्ट भी दिया था।

काबुल:अफगानिस्तान में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से और अगली सूचना आने तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। तालिबान सरकार की एक बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई है। 

यह पहली बार नहीं है जब लड़कियों और महिलाओं को लेकर तालिबान ने ऐसे फैसले लिए है। इससे पहले भी उनकी आजादी से रहने और उनकी शिक्षा को लेकर भी कई फैसले लिए गए है। 

तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने क्या कहा है

उच्च शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियाउल्लाह हाशमी द्वारा साझा किए गए पत्र में निजी और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को प्रतिबंध जल्द से जल्द लागू करने और प्रतिबंध लगाने के बाद मंत्रालय को सूचित करने को कहा है। हाशमी ने अपने पत्र को ट्वीट भी किया और ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को एक संदेश में इसकी सामग्री की पुष्टि की भी की है। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि करीब तीन महीने पहले ही अफगानिस्तान में हजारों लड़कियों और महिलाओं ने विश्वविद्यालयों  द्वारा आयोजित एक एडमिशन टेस्ट दिया था। ऐसे में इस नए आदेश के आने से उनका शिक्षा पर असर पड़ने वाला है। इससे उनके भविष्य पर भी बुरा असर पड़ने वाला है। 

लड़कियों और महिलाओं पर लगाए गए और बैन

तालिबान सरकार लड़कियों और महिलाओं को लेकर कोई न कोई फैसला लेता रहता है। ऐसा में इस सरकार का एक और फरमान है कि लड़कियों और महिलाओं अकेले बाहर नहीं जा सकती है। अगर वे बाहर जाना चाहती है तो उन्हें किसी पुरुष के साथ ही बाहर जाना चाहिए। 

इससे पहले भी महिलाओं के शिक्षा को लेकर फरमान जारी किया गया था और कहा गया था जिन स्कूल में पुरुष पढ़ते है, उसमें महिलाएं और युवतियां नहीं पढ़ सकेंगी। ऐसे में अफगानिस्तानी महिला समय-समय पर इन इन फरमान का विरोध भी करती रही है और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद भी करती रहती है।  

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