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इडुक्कीः बंदरों का आतंक, पुलिस थाने के ‘रक्षक’ बने ‘सांप’, आखिर जानें कैसे कर रहे रक्षा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 15, 2022 21:41 IST

पुलिस विभाग को एक अनोखा विचार सूझा। पुलिसकर्मी यहां केरल-तमिलनाडु सीमा पर स्थित कंबुमेट्टू पुलिस थाने के आसपास सांपों के प्रतिरूप (रबर से बना नकली सांप) का इस्तेमाल बंदरों को डराने के लिए करते हैं। यह तरकीब अब तक सफल रही है।

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ठळक मुद्देचीन में निर्मित ये नकली सांप, असली सरीसृप से मिलते-जुलते हैं। पुलिस थाने में नकली सांपों को विभिन्न स्थानों मसलन इमारत, जंगलों और पेड़ की शाखाओं आदि पर रखा गया है। जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए पहले से ही इस उपाय का इस्तेमाल कर रहा था।

इडुक्कीः पुलिसकर्मी आमतौर पर समाज के प्रहरी माने जाते हैं, लेकिन यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि केरल में ‘सांप’ इन कानून का पालन कराने वालों के रक्षक के रूप में सामने आए हैं। हालांकि रबर से बने ये सांप असली ना होकर, केवल उनके प्रतिरूप हैं।

इडुक्की में जंगली इलाके के पुलिस थाने में बंदरों के खतरे से खुद को बचाने के लिए पुलिस विभाग को एक अनोखा विचार सूझा। पुलिसकर्मी यहां केरल-तमिलनाडु सीमा पर स्थित कंबुमेट्टू पुलिस थाने के आसपास सांपों के प्रतिरूप (रबर से बना नकली सांप) का इस्तेमाल बंदरों को डराने के लिए करते हैं। यह तरकीब अब तक सफल रही है।

चीन में निर्मित ये नकली सांप, असली सरीसृप से मिलते-जुलते हैं। पुलिस थाने में नकली सांपों को विभिन्न स्थानों मसलन इमारत, जंगलों और पेड़ की शाखाओं आदि पर रखा गया है। पुलिसकर्मियों ने संपत्ति की रखवाली करने वाले एक स्थानीय पहरेदार की सलाह पर सांप की प्रतिकृतियों का इस्तेमाल किया, यह पहरेदार जंगली जानवरों को दूर रखने के लिए पहले से ही इस उपाय का इस्तेमाल कर रहा था।

कंबुमेट्टू के उपनिरीक्षक पी के लालभाई ने कहा कि रबर से बने नकली सांप जगह-जगह रखने का यह फायदा हुआ कि इन्हें देखने के बाद किसी भी बंदर ने पुलिस थाने के पास आने की हिम्मत नहीं दिखाई। बंदर गलती से इन प्रतिरूपों को असली सांप समझ लेते हैं।

एक अन्य पुलिसकर्मी सुनीश ने कहा कि बंदर कुछ वर्षों से थाने में कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर रहे थे। सुनीश ने कहा, ‘‘पहले बंदर समूह में आया करते थे, थाना परिसर में घुसकर सब्जियों की क्यारी को नष्ट कर देते थे। लेकिन रबर के नकली सांपों को लगाने के बाद उनका आना उल्लेखनीय रूप से कम हो गया है।’’ 

टॅग्स :केरलForest Department
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