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दिल्लीः दो पुलिस अधिकारियों को फल देने वाले 100 पेड़ लगाने का निर्देश दिया, उच्च न्यायालय ने कहा- पेड़ का न्यूनतम नर्सरी जीवन तीन साल हो और ऊंचाई कम से कम 10 फुट हो

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: June 14, 2023 12:46 IST

दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तहत वृक्ष अधिकारी को शीघ्र सहायता प्रदान करने लिए मौजूदा आदेश को प्रसारित करने का निर्देश दिया।

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ठळक मुद्देवकील के साथ इन पुलिस अधिकारियों का विवाद हो गया था।पुलिस कर्मियों द्वारा खेद प्रकट करने का अदालत ने संज्ञान लिया।न्यायाधीश ने उन्हें अवमानना की कार्यवाही से आरोप मुक्त कर दिया।

नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के दो पुलिस अधिकारियों को फल देने वाले 100 पेड़ लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने एक सरकारी एजेंसी द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्य के कारण पेड़ों को नुकसान से बचाने को लेकर एक वकील के साथ इन पुलिस अधिकारियों का विवाद हो गया था।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने दिल्ली पुलिस को पेड़ों की संरक्षण की अपनी ड्यूटी के प्रति पुलिस कर्मियों को संवेदनशील बनाने और वकीलों तथा लोगों के साथ इस तरह के "अवांछनीय झगड़े" से बचने के लिए और दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तहत वृक्ष अधिकारी को शीघ्र सहायता प्रदान करने लिए मौजूदा आदेश को प्रसारित करने का निर्देश दिया।

वह यहां पेड़ों के संरक्षण पर न्यायिक आदेशों के उल्लंघन के लिए शहर के कई अधिकारियों के खिलाफ एक अवमानना ​​मामले की सुनवाई कर रहे थे। दोनों पुलिस कर्मियों द्वारा खेद प्रकट करने का अदालत ने संज्ञान लिया और न्यायाधीश ने उन्हें अवमानना की कार्यवाही से आरोप मुक्त कर दिया।

लेकिन अधिकारियों से किंग्सवे कैंप में दिल्ली सशस्त्र पुलिस परेड ग्राउंड में वृक्षारोपण अभियान चलाने को कहा और यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करेंगे कि हर पेड़ का न्यूनतम नर्सरी जीवन तीन साल हो और उसकी ऊंचाई कम से कम 10 फुट हो।

अदालत ने 29 मई को पारित आदेश में कहा कि ये अधिकारी पिलखन, जामुन, अमलतास, गूलर, कथल, बाध, बरगद, कदम्ब, काला सिरस, सफेद सिरस, पापड़ी और मौलसिरी जैसे फल देने वाले 100 पेड़ लगाएं।

याचिकाकर्ता नयी दिल्ली नेचर सोसाइटी के वकील, अधिवक्ता आदित्य एन प्रसाद ने अदालत को बताया कि फरवरी 2021 में, जब उन्होंने कहा कि पुलिस को लोधी कॉलोनी इलाके में निर्माण कार्य के कारण कुछ पेड़ों को नुकसान से बचाना चाहिए तो संबंधित अतिरिक्त एसएचओ और एसएचओ का उनसे विवाद हो गया। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि संबंधित पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने अधिकारियों को चेतावनी दी है और उन्होंने वकील से माफी मांग ली है। 

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