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नागरिकता संशोधन कानून पर 'अर्थशास्त्री' की 'नेताओं' को सीख

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 14, 2020 15:43 IST

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संशोधित नागरिकता कानून को रद्द करने की मांग करने के कुछ ही दिन बाद नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि किसी भी कारण के लिए प्रदर्शन करने की खातिर विपक्ष की एकता जरूरी है...हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष में एकता नहीं होने के बावजूद प्रदर्शन जारी रह सकते हैं.. सेन ने ये भी कहा कि अगर एकता नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम प्रदर्शन बंद कर देंगे..सेन कहते हैं कि एकता से प्रदर्शन आसान हो जाता है, लेकिन अगर एकता नहीं है तो भी हमें आगे बढ़ना होगा और जो जरूरी है, वह करना होगा।’’ विपक्ष की एकता की बात आखिर उठी कहां से..थोड़ा पीछे चलेंगे तो आपको दरारें देखने को मिल जायेंगी...विपक्षी एकता पर पंश्चिम बंगाल से भी चोट लगी और यूपी से भी ..बसपा प्रमुख मायावती ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर चर्चा के लिए कांग्रेस द्वारा बुलाई गई विपक्षी पार्टियों की बैठक से दूरी बना ली...दरअसल मायावती बसपा के साथ राजस्थान में कांग्रेस के खेल से नाराज दिखी.. मायावती ने ट्वीट किया, ''जैसा कि विदित है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार को बसपा का बाहर से समर्थन दिए जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार वहाँ बसपा विधायकों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो यह पूर्णत: विश्वासघात है।'' उन्होंने कहा, ''ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बसपा का शामिल होना, यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा। ' मायावती ने ट्वीट में कहा, ''वैसे भी बसपा सीएए और एनआरसी आदि के विरोध में है इतना ही नहीं बसपा प्रमुख ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की कोटा अस्पताल कांड पर ध्यान नहीं देने के लिए उनका नाम लिये बगैर आलोचना की थी.. बसपा सुप्रीमों ने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘कांग्रेस की नेता उप्र में तो आए दिन घड़ियालू आँसू बहाने आ जाती हैं। लेकिन राजस्थान में वह अपने निजी कार्यक्रम के दौरान अपना थोड़ा भी समय कोटा में उन बच्चों की मांओं के आँसू पोछने के लिए देना उचित नहीं समझती हैं जबकि वह भी एक मां हैं ।  प्रियंका गांधी 11 जनवरी को एक शादी में हिस्सा लेने के लिए जयपुर गई थीं..बसपा सुप्रीमों से पहले नौ जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा 13 जनवरी को बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक का वह बहिष्कार करेंगी..ममता का कहना है कि ट्रेड यूनियनों के भारत बंद के दौरान राज्य में वामपंथी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई कथित हिंसा के विरोध में उन्होंने बैठक के बहिष्कार का फैसला किया है.. एक अर्थ शास्त्री विपक्षी एकता के मंत्र दे रहे हैं लेकिन विपक्षी एकता के पहिये खोलने में लगे लोग खांटी नेता हैं..कांग्रेस की बढ़ती भाग दौड़ बहन जी को यूपी में रास नहीं आ रही और दीदी को भी पश्चिम बंगाल में ..बहन जी को और दीदी दोनों को ही विपक्षी एकता से ज्यादा अपने वोट बैंक पर डाके की चिंता ज्यादा है.. क्यों अगर पंजा अपने पैरों पर खड़ा हुआ थे दोनों के वोट खिसकेंगे...इस लिए अब दोनों को सरकार के विरोध के साथ साथ अपनी भी जमीन बचाने की चिंता है..ये उनकी रणनीति है और या मजबूरी ये तो फिलहाल पर्दे के पीछे है..  
टॅग्स :कैब प्रोटेस्टनोबेल पुरस्कारममता बनर्जीमायावतीमोदीअमित शाह
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