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'ऑपरेशन लोटस' के मारे कमलनाथ क्या महाराष्ट्र में सहेज पाएंगे कांग्रेस विधायकों को

By आशीष कुमार पाण्डेय | Published: June 22, 2022 06:37 PM2022-06-22T18:37:37+5:302022-06-22T18:39:39+5:30

कांग्रेस पार्टी ने उद्धव सरकार की रक्षा के लिए दिल्ली से कमलनाथ को मुंबई भेजा है। दरअसल एनसीपी और शिवसेना के साथ कांग्रेस भी इस बेहतर तरीके से समझ रही है कि अगर महाराष्ट्र में भाजपा का ऑपरेशन लोटस कामयाब हो जाता है तो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इसका बखूबी फायदा उठायेगी।

यही कारण है कि मुंबई में डेरा डाले हुए कमलनाथ महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों को सहेजने में लग गये हैं। साथ ही वो एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार पर छाये गहरे संकट के बादलों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। 

लेकिन ये भी अजीब इत्तेफाक है कि कांग्रेस ने इस सियासी जंग के लिए उस कमलनाथ को अपना सिपहसालार बनाया, जो मध्य प्रदेश में 15 साल बाद मिली कांग्रेस की सत्ता को 15 महीने भी नहीं संभाल पाये और साल 2020 में इसी भाजपा के हाथों मात खा चुके हैं।

मुंबई पहुंचे कमलनाथ ने फौरन उद्धव सरकार को इस संकट से उबारने के लिए एनसीपी नेता शरद पवार से मिले और ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की।

कमलनाथ ने महाराष्ट्र संकट के लिए भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा इस देश की राजनीति सौदेबाजी और पैसों के खेल पर चलाना चाहती है। कमलनाथ ने खुद को साल 2020 में इसका पीड़ित बताते हुए कहा कि पूरे देश ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देखा है।

ऑपरेशन लोटस को लोकत्रांतिक राजनीति के लिए बहुत बड़ा खतरा बताते हुए कमलनाथ ने कहा कि भाजपा जो पैसों और भय का ट्रेंड सेट कर रही है, वो आने वाले वक्त में उसके लिए भी घातक साबित होगा।

इसके साथ ही कमलनाथ ने जोर देते हुए कहा कि खतरे की इस स्थिति में शिवसेना को खुद तय करना है कि वे अपने विधायकों से कैसे बात करेंगे लेकिन एक बात तो साफ है कि कांग्रेस के विधायक बिकाऊ नहीं हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि साल 2020 में जब कमलनाथ को 230 सीटों वाली मध्य प्रदेश की विधानसभा में 114 विधायकों के रहते हुए उसी भाजपा से महज 109 विधायक के बूते आखिर कैसे मात खा गये थे। 

तो इसका जवाब हम बता रहे हैं, दरअसल वहां भी भाजपा ने ऑपरेशन लोटस के जरिये सिंधिया समर्थक 22 विधायकों को तोड़ लिया था और कमलनाथ को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मध्य प्रदेश में जैसे ही कमलनाथ की सरकार भरभरा कर गिरी 23 मार्च 2020 को भाजपा के शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर कब्जा कर लिया।

अब कुछ-कुछ उसी तरह की व्यूह रचना महाराष्ट्र में भी हो रही है, लेकिन शिवसेना इतनी आसानी से हार मानने वाली नहीं है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि अगर भाजपा इस तरह का गंदा खेल खेल खेलती है तो पार्टी सीधे चुनाव में जाना पसंद करेगी और फिर भाजपा के सीधे जनता के बीच जवाब देना होगा।

अब उद्धव ठाकरे की सत्ता बचती है या फिर ईवीएम के जरिए महाराष्ट्र की जनता को फिर से नया मुख्यमंत्री चुनना होगा, या फिर एकनाथ शिंदे भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस को फिर से मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठाते हैं। यह तो देखने की बात होगी लेकिन इतना तो पक्का तय है कि महाराष्ट्र की सियासत में एकनाथ शिंदे की बगावत एक नया अध्याय जरूर लिखेगी। 

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