लाइव न्यूज़ :

Sankashti Chaturathi Puja: कल है संकष्टी चतुर्थी, दही में चीनी मिलाकर करें बस ये 1 उपाय-बन जाएंगे सभी बिगड़े काम

By मेघना वर्मा | Updated: April 10, 2020 08:41 IST

भगवान गणेश, हिन्दू मान्यताओं में प्रथम पूजनीय हैं। उनसे जुड़ा उपवास संकष्टी चतुर्थी को हिन्दू धर्म में पवित्र पर्व बताया गया है।

Open in App
ठळक मुद्देभगवान गणेश को मोदक बहुत पसंद होते हैं।संकष्टी चतुर्थी पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को कहते हैं।

भगवान गणेश को हिन्दू धर्म में प्रथम पूजनीय माना जाता है। कहते हैं हर शुभ काम की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाए तो सारी मुश्किलें आसान हो जाती हैं। भगवान गणेश से जुड़े हुए सभी व्रतों पर लोग उनकी उपासना करते हैं। इन्हीं व्रतों में से एक है संकष्टी चतुर्थी का पर्व। 

वहीं पंचाग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथी को भगवान गणेश की संकष्टी चतुर्थी का तीज पड़ता है। इस बार ये पर्व 11 अप्रैल को पड़ रहा है। माना जाता है कि जो भी उपासक इस दिन गणेश भगवान की पूजा करता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। आइ आपको बताते हैं संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

घर में होता है सुख-शांति का वास

संकष्टी चतुर्थी पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को कहते हैं। वहीं अमावस्य के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजन करने से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है। वहीं व्रत रखने वाली की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

बन जाएंगे बिगड़े काम

वैसे तो माना जाता है कि भगवान गणेश को मोदक बहुत पसंद होते हैं। मगर आप उन्हें दही और चीनी का भी भोग लगा सकते हैं। मान्यता है कि अगर आपके जीवन में लगातार परेशानियां चल रही हों या आपका कोई काम, बन ना रहा हो तो संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को दही और चीनी का भोग लगा दीजिए। ध्यान रहें दही-चीनी को छाया देकर ही भगवान गणेश को अर्पित करें। आप चाहें तो गणपति को दुर्वा भी अर्पित कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

संकष्टी चतुर्थी - 10 अप्रैलचतुर्थी तिथी आरंभ - 9 बजकर 31 मिनट(10 अप्रैल)चतुर्थी तिथि समांपत - 7 बजकर एक मिनट (11 अप्रैल)

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

1. इस दिन सुबह जल्दी स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2. अब भगवान गणेश का स्मरण करके व्रत का संकल्प लें।3. अब पूजा घर या पवित्र स्थान पर लाल या पीला कपड़ा लेकर चौकी पर बिछाएं और उस पर गणेश जी को विराजमान करें।4. अब प्रतिमा या तस्वीर पर गंगाजल छिड़कें।

5. इसके बाद प्रतिमा पर गंध, पुष्प, अक्षत, जल, दूर्वा, पान, रोली आदि से विधि-पूर्वक पूजा करें। 6. अब भगवान गणेश को भोग लगाएं। 7. अब आरती करके अंत में प्रसाद वितरण करें।8. इस दिन चंद्रमा दर्शन होने पर शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से चंद्रमा को अर्घ्य भी दें।

टॅग्स :गणेश चतुर्थीभगवान गणेशपूजा पाठ
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठMakar Sankranti 2026: जिजीविषा का उत्प्रेरक पर्व है मकर संक्रांति

पूजा पाठगणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा

पूजा पाठDiwali Puja Time Today: दिवाली पूजा का समय और शुभ मुहूर्त कब है?, 20 अक्टूबर गणेश-लक्ष्मी पूजा...

पूजा पाठHappy Diwali 2025 Wishes: दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं, मैसेज, फोटो, स्टेटस...

पूजा पाठDhanteras 2025 के दिन सोना और चांदी खरीदने के लिए क्या है शुभ मुहूर्त? जानें पूजा का समय और सबकुछ

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 05 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 05 April 2026: आज शत्रुओं की चाल से बचें वृषभ राशि के लोग, कर्क राशिवालों के जीवन में खुशियां

पूजा पाठGuru Nakshatra Parivartan 2026: अप्रैल में इन 5 राशिवालों का शुरू होगा गोल्डन पीरियड, मोटी कमाई की उम्मीद

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल