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Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि बनेंगे ये शुभ योग, ग्रहों की स्थिति भी भक्तों के लिए होगी अनुकूल

By रुस्तम राणा | Updated: February 7, 2026 16:47 IST

न्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव पृथ्वी के सभी शिवलिंगों में विराजमान होते हैं, इसलिए इस दिन की पूजा विशेष फलदायी होती है।

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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक बड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष यह पावन पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव पृथ्वी के सभी शिवलिंगों में विराजमान होते हैं, इसलिए इस दिन की पूजा विशेष फलदायी होती है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस बार महाशिवरात्रि के दिन दुर्लभ ग्रह योग बन रहे हैं। 

साथ ही ग्रहों के कारण इस दिन कुंभ राशि में चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। जिसके कारण शिवभक्तों को इसके अनूठे लाभ प्राप्त होने वाले हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, व्रत और अभिषेक करने से सुख, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। चार प्रहर की पूजा, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है।

महाशिवरात्रि 2026 पर जानें शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

इस साल चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:06 बजे शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5:35 बजे तक रहेगी। इसी कारण महाशिवरात्रि 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी के साथ मनाई जाएगी। 

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 7:08 बजे से शाम 7:48 बजे तक रहेगा। यह योग बाधाओं को दूर कर सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग तथा व्यतीपात योग दिन की आध्यात्मिक शक्ति को और बढ़ा देगा। सूर्य, बुध, राहु और शुक्र के एक साथ आने से चतुर्ग्रही योग बनेगा, जो आध्यात्मिक उन्नति, समृद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है।

चार प्रहर की पूजा का महत्व

शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात के चारों प्रहरों में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक प्रहर की पूजा का अलग आध्यात्मिक फल होता है। चारों प्रहर की पूजा करने से धन, यश, स्थिरता, और संतान से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

चार प्रहर पूजा मुहूर्त

प्रथम प्रहर: शाम 6:15 – 9:28द्वितीय प्रहर: रात 9:29 – 12:41तृतीय प्रहर: रात 12:42 – सुबह 3:54 (16 फरवरी)चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:55 – 7:07 (16 फरवरी)

महाशिवरात्रि पर किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठान

महाशिवरात्रि के दिन भक्त सुबह से ही शिव मंदिरों में जाकर अभिषेक, मंत्र जाप और व्रत करते हैं। कई लोग घर पर भी पूरे विधि-विधान से रुद्राभिषेक करते हैं।

बेलपत्र अर्पित करना धन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।

जो मंदिर नहीं जा सकते, वे घर में छोटा शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं, जैसा कि शास्त्रों में बताया गया है।

टॅग्स :महाशिवरात्रिभगवान शिवहिंदू त्योहार
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