Lohri 2026 Date: लोहड़ी कब है? जानिए इस पर्व की तारीख, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: January 3, 2026 14:36 IST2026-01-03T14:36:43+5:302026-01-03T14:36:55+5:30

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है, जो इस समय को ज्योतिषीय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

Lohri 2026: Date, significance, rituals and cultural meaning | Lohri 2026 Date: लोहड़ी कब है? जानिए इस पर्व की तारीख, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक महत्व

Lohri 2026 Date: लोहड़ी कब है? जानिए इस पर्व की तारीख, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक महत्व

Lohri 2026: लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसका अपना एक गहरा भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह उत्तर भारत के सबसे जीवंत सर्दियों के त्योहारों में से एक है। पंजाबी संस्कृति में गहराई से जुड़ा, लोहड़ी सिख और हिंदू धर्म के लोगों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो कड़ाके की सर्दी के खत्म होने और लंबे दिनों के आने का प्रतीक है। 

लोहड़ी 2026 कब है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है, जो इस समय को ज्योतिषीय और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। इसलिए इस साल लोहड़ी 13 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। 

लोहड़ी 2026 के लिए महत्वपूर्ण तारीखें और समय

लोहड़ी की तारीख: मंगलवार, 13 जनवरी, 2026
लोहड़ी संक्रांति का क्षण: अपराह्न 03:13 बजे, 14 जनवरी, 2026

लोहड़ी क्या है?

लोहड़ी एक फसल और मौसमी त्योहार है जो सर्दियों के खत्म होने और रबी की फसल की बुवाई का जश्न है। हालांकि इसे बड़े पैमाने पर सिख त्योहार के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसकी तारीख हिंदू ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार तय की जाती है, जो इसकी साझा सांस्कृतिक जड़ों को दिखाता है। इस त्योहार को दूसरे नामों से भी जाना जाता है, जैसे लोहड़ी या लाल लोई, खासकर ग्रामीण पंजाब में।

लोहड़ी और मकर संक्रांति के बीच संबंध

लोहड़ी मकर संक्रांति से बहुत करीब से जुड़ा हुआ है, जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। जहां मकर संक्रांति सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रतीक है, वहीं लोहड़ी जश्न की शाम है, जिसमें आग की रस्में, गाने और सामुदायिक सभाएं होती हैं।

लोहड़ी की आग का महत्व

आग लोहड़ी के जश्न का केंद्र बिंदु होता है। लोग आग के चारों ओर इकट्ठा होते हैं और इसमें तिल के बीज, गुड़, मूंगफली रेवड़ी और गजक आदि चीजें अर्पित करते हैं। यह आग आग की पूजा, भरपूर फसल के लिए आभार, और ठंड के मौसम में समृद्धि और गर्मी के लिए प्रार्थना का प्रतीक है।

लोहड़ी का जश्न और परंपराएं

-दुल्ला भट्टी जैसे लोक नायकों की तारीफ में पारंपरिक लोहड़ी गीत गाना
-भांगड़ा और गिद्दा परफॉर्मेंस, 
-तिल और गुड़ से बने फेस्टिव खाने की चीजें शेयर करना
-नए शादीशुदा जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए खास महत्व, जिनके लिए लोहड़ी और भी ज़्यादा खुशी से मनाई जाती है
-परिवार, पड़ोसी और समुदाय एक साथ आते हैं, जिससे एकता के बंधन मज़बूत होते हैं।

पंजाब में लोहड़ी का खास महत्व क्यों है?

किसानों के लिए, लोहड़ी फसल कटाई से पहले एक ब्रेक का प्रतीक है, जो अच्छी फसल के लिए प्रकृति का धन्यवाद करने का मौका देती है। यह पंजाबी पहचान, लोककथाओं और खेती-बाड़ी के जीवन का भी जश्न है, जो इसे इस क्षेत्र के सबसे भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक बनाता है।

जैसे ही 13 जनवरी को लोहड़ी 2026 आएगी, घरों और सार्वजनिक जगहों पर आग, हंसी और संगीत की रोशनी होगी। सिर्फ़ एक मौसमी जश्न से कहीं ज़्यादा, लोहड़ी आभार, सामुदायिक भावना और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक निरंतरता की याद दिलाती रहती है।

Web Title: Lohri 2026: Date, significance, rituals and cultural meaning

पूजा पाठ से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे