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Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी व्रत 20 या 21 जुलाई को, जानें सही तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: July 19, 2025 17:27 IST

कामिका एकादशी का व्रत आध्यात्मिक शांति, पुण्य लाभ और प्रभु कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और सेवा से जीवन की कठिनाइयों का समाधान पाया जा सकता है।

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Kamika Ekadashi 2025 : कामिका एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दिन उपवास, पूजा-पाठ और कथा श्रवण का विशेष महत्व होता है। कामिका एकादशी का व्रत आध्यात्मिक शांति, पुण्य लाभ और प्रभु कृपा पाने का सुनहरा अवसर है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और सेवा से जीवन की कठिनाइयों का समाधान पाया जा सकता है। जो श्रद्धा से इस व्रत को करता है, उसे वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है। 

कामिका एकादशी व्रत 20 या 21 जुलाई को ?

कामिका एकादशी कब है 2025 पंचांग के अनुसार, श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि यानी एकादशी तिथि 20 जुलाई को दोपहर 12:12 बजे से शुरू होती है और इस तिथि का समापन 21 जुलाई को सुबह 9:38 बजे होगा। 21 जुलाई को एकादशी की उदया तिथि है जिसकी वजह से इसी दिन ही कामिका एकादशी आधिकारिक तौर मनाई जाएगी।

 

कामिका एकादशी की पूजा विधि:

प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।घर में मंदिर को साफ करके भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।फल, फूल, तुलसी दल, पंचामृत आदि से श्रीहरि विष्णु की पूजा करें।'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।व्रत कथा सुनें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।पूरे दिन व्रत रखें, फलाहार कर सकते हैं या निर्जला उपवास भी कर सकते हैं।रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।

कामिका एकादशी के दिन क्या करें:

तुलसी का पूजन करें और भगवान को अर्पित करें।दान-पुण्य करें, खासकर अन्न और वस्त्र दान।जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

कामिका एकादशी के दिन क्या न करें:

क्रोध, झूठ और छल से दूर रहें।लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली वस्तुओं से परहेज करें।व्रत के नियमों का उल्लंघन न करें।

कामिका एकादशी का महत्व:

पुराणों के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो मानसिक तनाव, दोष या पिछले कर्मों के प्रभाव से मुक्ति पाना चाहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत न केवल सांसारिक सुख देता है, बल्कि पुण्य फल प्रदान कर जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति भी दिलाता है।

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