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जानिए बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी पूजा विधि, शुभ मुहुर्त, श्रीकृष्ण से भी है कनेक्शन

By मेघना वर्मा | Updated: April 30, 2018 08:41 IST

बुद्ध पूर्णिमा 2018: महात्मा बुद्ध ने हमेशा मनुष्य को भविष्य की चिंता से निकलकर वर्तमान में खड़े रहने की शिक्षा दी।

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हिन्दू मान्यताओं में जहां वैशाख पूर्णिमा का दिन सत्य विनायक पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है वहीं आज के दिन देश और दुनिया भर में बुद्ध पूर्णिमा पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाई जाती है। 30 अप्रैल यानी आज के दिन बुद्धत्व को प्राप्त करने वाले भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। हिन्दू मान्यताओं में भगवान् बुद्ध को विष्णु भगवान का अवतार बताया गया है। यही कारण है कि पूरे भारत में आज के दिन भगवान बुद्ध और विष्णु की विधिवत पूजा होती है। बुद्ध पूर्णिमा न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों में भी पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, नेपाल थाईलैंड, मलयेशिया, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। श्रीलंका में इस दिन को 'वेसाक' के नाम से जाना जाता है, जो निश्चित रूप से वैशाख का ही अपभ्रंश है। 

क्या है सही मुहूर्त

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 29 अप्रैल 2018 को सुबह 6:37 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल 2018 को 6:27 बजे खत्म होगा। हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि को ही मनाया जाता है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा भी 30 अप्रैल, सोमवार को मनायी जाएगी।

कैसे करें पूजा

बुद्ध पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि आज के दिन गंगा स्नान करके व्यक्ति को उसके सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है तथा उसके अन्दर सकारात्मकता आती है। बुद्ध पूर्णिमा पर बौद्ध मतावलंबी बौद्ध विहारों और मठों में इकट्ठा होकर एक साथ उपासना करते हैं। दीप जलाते हैं। रंगीन पताकाओं से सजावट की जाती है और बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं। इस दिन भक्त भगवान महावीर पर फूल चढ़ाते हैं, अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाते हैं तथा भगवान बुद्ध के पैर छूकर शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

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क्या है सत्य विनायक पूर्णिमा

हिन्दू धर्म में वैशाख की पूर्णिमा को सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण से मिलने जब सुदामा पहुंचे तो उनको सत्य विनायक व्रत रखने की सलाह दी गयी जिनके प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता मिट जायेगी। यही कारण है कि लोग आज के दिन श्रीकृष्ण की पूजा के साथ व्रत भी रखते हैं ताकि उनकी भी दरिद्रता दूर हो सके और घर में शांति हो। 

माहत्मा बुद्ध की दी शिक्षा आज भी है अचूक

महात्मा बुद्ध ने हमेशा मनुष्य को भविष्य की चिंता से निकलकर वर्तमान में खड़े रहने की शिक्षा दी। उन्होंने दुनिया को बताया आप अभी अपनी जिंदगी को जिएं, भविष्य के बारे में सोचकर समय बर्बाद ना करें। बिहार के बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई और उनके ज्ञान की रौशनी पूरी दुनिया में फैली। 

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