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बर्थडे स्पेशल : इंदिरा गांधी के वो 5 अहम फैसले जिन्होंने उनको बनाया आयरन लेडी

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: November 19, 2018 09:08 IST

Indira Gandhi Birth Anniversary: भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी  की आज 101 वीं जन्मतिथि है।  आयरन लेडी इंदिरा के जन्मदिन पर जानें जीवन के कुछ अहम फैसले-

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भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी  की आज 101 वीं जन्मतिथि है।  इंदिरा गांधी को आयरन लेडी भी कहा जाता है। इंदिरा के बुलंद हौसलों की मिसाल आज भी दी जाती है। देश की राजनीति में इतिहास में जब किसी प्रधानमंत्री का नाम लिया जाता है, उसमें  इंदिरा का नाम सबसे ऊपर आता है। इंदिरा गांधी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुत्री थीं। उनका जन्म 19 नवम्बर 1917 को हुआ था। उन्होंने ऑक्सफोर्ड जैसे प्रमुख संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की थी। आइए आज इंदिरा के जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें-

पहली महिला प्रधानमंत्री

लाल बहादुर शास्त्री जी के निधन के बाद इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उस समय इंदिरा के अलावा देश के पास कोई दूसरा ऐसा नेता नहीं था जो सत्ता को संभाल सके। इसके बाद वह एक लंबे समय तक (15 साल) तक देश की पीएम रही थी। 

कहा गया था कुछ ऐसा 

लालबहादुर शास्त्री के बाद जब इंदिरा प्रधानमंत्री बनीं को जनता को उनको समझने में समय लगा। शायद यही कारण था कि इंदिरा को शुरू में 'गूंगी गुड़‍िया' की उपाधि तक दी गई थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने हर किसी को बता दिया ना तो फैसले लेने में डरती हैं और ना हीं उनके इरादे सुस्त हैं।  1966 से 1977 और 1980 से 1984 के दौरान प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा ने अपने साहसी फैसलों के कारण साबित कर दिया था।

बनीं आयरन लेडी

इंदिरा ने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले लिए थे। केरल से कम्युनिस्टों की सरकार को पलटकर राष्ट्रपति शासन लगाने की हिम्मत भी इंदिरा ने ही दिखाई थी। इतना ही नहीं उन्होंने अपने अहम फैसले के रूप में  भारत के पहले परमाणु परीक्षण ‘बुद्धा स्माइलिंग’ का फैसला तो हर कोई भोचक्का रह गया था।  लेकिन इंदिरा कभी भी अपने फैसलों और इरादों से पीछे नहीं हटीं।  बांग्लादेश में भारतीय सेना भेजने का फैसला भी इंदिरा गांधी के सबसे साहसिक फैसलों में गिना जाता है। इंदिरा के इस फैसले की वजह से भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। 1969 में जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इंदिरा को पार्टी से निकाल दिया तो उन्होंने अपनी पार्टी बनायी। इसके बाद इंदिरा ने अपने दमपर मैदान में उतरने का फैसला लिया और 1971 के आम चुनाव में जीत भी हासिल की। जिसके बाद कांग्रेस को उसकी असली पहचान मिली। 19 जुलाई 1969 में इंदिरा ने एर और अहम फैसला लेते हुए 14 निजी बैकों को राष्ट्रीयकरण कर दिया था। जिस वक्त उन्होंने ये फैसला लिया था इन बैकों के पास महज 70 फीसदी ही जमापूंजी थी बाकी 40 फीसदी को प्राइमरी सेक्टर में निवेश के लिए रखा गया था।यही कारण है कि आज वह देश की आयरन लेडी के रूप में जानी जाती हैं।

आपातकाल का फैसला

वैसे तो इंदिरा को एक बेहतरीन राजनेता के रूप में हमेशा देखा जाता है। लेकिन 1975 का उनका एक फैसला आज भी उनको सवालों में खड़ा कर देता है। -  1975 में इंदिरा ने बिना किसी आने वाले कल का सोचे आपातकाल लगा दिया था। आपातकाल लगाने का उनका पूरे देश में जमकर विरोध किया गया। इसका असर उनके राजनीतिक करियर पर भी पड़ा।  इसका ही एक रूप रहा कि 1977 में देश की जनता ने उन्हें नकार दिया, हालांकि कुछ वर्षों बाद ही फिर से सत्ता में उनकी वापसी हुई। 

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