bsp chief mayawati 65th birthday not alliance assembly elections in uttar pradesh and uttarakhand lucknow | बसपा प्रमुख मायावती ने किया ऐलान- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अकेले लड़ेंगे चुनाव, सपा-कांग्रेस से गठबंधन नहीं
समाजवार्दी पार्टी, कांग्रेस या किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया जाएगा। (file photo)

Highlightsबसपा के सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर इन चुनावों की तैयारी शुरू करनी चाहिए।केंद्र सरकार को किसानों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए और नए कृषि कानूनों को रद्द करना चाहिए।पार्टी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।

लखनऊः बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि वह 2022 विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेंगी। मायावती आज 65 साल की हो गईं।

बसपा प्रमुख ने अपने जन्मदिन पर कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में 2022 में चुनाव है। वह अपने दम पर चुनाव लड़ेंगी। समाजवार्दी पार्टी, कांग्रेस या किसी भी दल से गठबंधन नहीं किया जाएगा। 2012 के बाद से कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी पर कई आरोप लगाए। 

बसपा अपने दम पर सभी निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी

मायावती ने अपने जन्मदिन पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बसपा अपने दम पर सभी निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि यदि "बसपा उत्तर प्रदेश में सरकार बनाती है, तो वह सभी को मुफ्त में COVID-19 वैक्सीन प्रदान करेगी"।

चार बार की मुख्यमंत्री रहीं, मायावती ने आखिरी बार 2007 और 2012 में सीएम के रूप में कार्य किया। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने समेत किसानों की सभी मांगें भी स्वीकार करे। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से 'जनकल्याणकारी दिवस' के रूप में उनका जन्मदिन मनाने की अपील की।

पुस्तक ‘मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ का विमोचन भी किया

जन्मदिन के मौके पर उन्होंने अपनी पुस्तक ‘मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ का विमोचन भी किया। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बसपा इन दोनों राज्यों में किसी भी दल के साथ किसी तरह का चुनावी समझौता नहीं करेगी। इसका मतलब यह है कि बसपा इन दोनों राज्यों में सभी सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी।’’

बसपा प्रमुख ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पहले के सपा और कांग्रेस के शासनकाल तथा अब भाजपा के शासनकाल को भी लोग पसंद नहीं कर रहे हैं। वे बसपा को मौका देना चाहते हैं। उत्तराखंड में भी यही स्थिति है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं।

विरोधी पार्टियों ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर बसपा को सत्ता में आने से रोका है

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘विरोधी पार्टियों ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर बसपा को सत्ता में आने से रोका है। अब तो ये पार्टियां ख्ररीद-फरोख्त करके और पर्दे के पीछे से दूसरे संगठन बनवाकर कमजोर वर्गों के वोट बांट रही हैं। ये पार्टियां अंग्रेजों की तरह से ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चलकर गरीबों और कमजोरों पर राज करती आ रही हैं।’’

मायावती ने कहा, ‘‘हमें गरीबों, कमजोरों और उपेक्षित वर्गों के वोटों को बंटने नहीं देना है। हमें इन वर्गों को फिर साथ करके सत्ता हासिल करनी है। 2003 के अनुभवों से प्रेरणा लेकर बसपा को फिर से सत्ता में आना है। उस समय की मेहनत का नतीजा था कि 2007 में बसपा की बहुमत की सरकार बनी थी। उसी तरह से एक बार फिर सत्ता प्राप्त करनी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर कार्यकर्ता मेहनत करके उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में बसपा की सरकार लाते हैं तो यही मेरे जन्मदिन का तोहफा होगा।’’

किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने केंद्र से आग्रह किया, ‘‘सरकार को तीनों कानूनों को वापस लेने समेत किसानों की सभी मागों को स्वीकार करना चाहिए।’’ मायावती ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से सबको कोरोना का टीका मुफ्त लगाया जाना चाहिए और अगर वह ऐसा नहीं करती है तो फिर राज्य सरकारों को लोगों को यह सुविधा देनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर उत्तर प्रदेश में टीके की सुविधा मुफ्त में नहीं दी जाती है तो हमारी सरकार बनने के बाद लोगों को मुफ्त में टीका लगाया जाएगा।’’

(इनपुट एजेंसी)

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