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बिहार विधानसभा चुनावः लालू प्रसाद यादव पर सुशील मोदी का तीखा हमला, दलितों को गाजर-मूली की तरह काटा गया

By एस पी सिन्हा | Updated: June 20, 2020 21:00 IST

राजद-कांग्रेस के लोगों को 15 साल का मौका मिला तो अतिपिछड़ों को अपमानित व दलितों को नरसंहारों की भेंट चढ़ाने का काम किया. उन्होंने पूछा है कि राजद प्रमुख लालू यादव बतायें, कि अपने 15 वर्षों के राज में अतिपिछड़ों, दलितों व महिलाओं को पंचायत चुनाव में आरक्षण क्यों नहीं दिया?

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ठळक मुद्देनौकरियों में जो आरक्षण की व्यवस्था है, वह कर्पूरी जी की उस सरकार की देन है जिसमें भाजपा भी शामिल थी. सुशील मोदी ने कहा कि अतिपिछड़ों  की बेशुमार ताकत के बल पर ही लालू प्रसाद यादव कभी जिन्न निकालने का दावा करते नहीं थकते थे. लालू-राबड़ी राज में एक ओर जहां दलितों को गाजर-मूली की तरह काटा गया.

पटनाः बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज फिर से राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि 1995 में लालू प्रसाद के पक्ष में बैलेट बाक्स से निकलने वाला अतिपिछड़ों का ‘जिन्न’ उनकी प्रताड़ना से परेशान होकर 2005 के बाद पूरी तरह से एनडीए के पाले में आ गया.

उन्होंने कहा कि राजद-कांग्रेस के लोगों को 15 साल का मौका मिला तो अतिपिछड़ों को अपमानित व दलितों को नरसंहारों की भेंट चढ़ाने का काम किया. उन्होंने पूछा है कि राजद प्रमुख लालू यादव बतायें, कि अपने 15 वर्षों के राज में अतिपिछड़ों, दलितों व महिलाओं को पंचायत चुनाव में आरक्षण क्यों नहीं दिया?

एक ओर तो राजद-कांग्रेस ने 23वर्षों तक पंचायत का चुनाव नहीं कराया, जब कराया तो इन वर्गों को आरक्षण से वंचित कर दिया. जब 2005 में एनडीए की सरकार बनी तो पंचायत चुनाव में एकल पदों पर मुखिया, प्रमुख, जिला परिषद अध्यक्षों व वार्ड सदस्यों के लिए अतिपिछड़ों  को 20 फीसदी, दलितों को 17 और महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप आज इन वर्गों से हजारों जनप्रतिनिधि चुन कर आ रहे हैं. इसी प्रकार नौकरियों में जो आरक्षण की व्यवस्था है, वह कर्पूरी जी की उस सरकार की देन है जिसमें भाजपा भी शामिल थी.

सुशील मोदी ने कहा कि अतिपिछड़ों  की बेशुमार ताकत के बल पर ही लालू प्रसाद यादव कभी जिन्न निकालने का दावा करते नहीं थकते थे. मगर चुनावी जीत के बाद उन्हें कभी उनके मान-सम्मान की सुध नहीं रही. लालू-राबड़ी राज में एक ओर जहां दलितों को गाजर-मूली की तरह काटा गया. वहीं अतिपिछड़ों को प्रताड़ित, अपमानित किया गया. उस दौर की प्रताड़ना और अपमान को स्वाभिमानी अति पिछड़ा समाज कभी नहीं भूलेगा.

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