1 / 8महाकाल सवारीकार्तिक मास के सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की पहली सवारी निकाली गई।2 / 8सर्वप्रथमकलेक्टर मनीष सिंह ने पाली को उठाया साथ में महाकाल मंदिर प्रशासक अभिषेक दुबे ने भी पालकी को उठाकर आगे चले।3 / 8भगवान महाकाल राजसी ठाठ बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकले। बाबा की एक झलक पाने के लिए लोगो का हुजूम सड़कों पर देखा गया। 4 / 8उज्जैन में सावन-भादौ माह की तरह ही कार्तिक – अगहन माह में भी महाकाल की सवारी निकालने की परम्परा है।5 / 8अपरांन्ह सभा मंडप में पूजन के बाद राजा महाकाल के चंद्रमोलेश्वर स्वरूप को चाँदी की पालकी में बैठाकर मंदिर से बाहर लाया गया।6 / 8मंदिर से निकलते ही पुलिस बैंड और जवानों के द्वारा सवारी को गार्ड आफ ओनर दिया गया ।7 / 8सवारी के आगे घोड़ा, बैंड, पुलिस टुकड़ी तथा भजन मंडलियाँ चल रही थीं। महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे शुरू हुई बाबा की सवारी परंपरागत मार्गों से होती हुई शिप्रा नदी पहुंची।8 / 8मान्यता है कि भगवान महाकाल सवारी के रूप में अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते है। वहीं अपने राजा की एक झलक पाने के लिए प्रजा भी घंटों तक सड़क के किनारे इंतजार करती है।