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ईरान: भारतीय बैडमिण्टन खिलाड़ी तान्या हेमंत को स्वर्ण पदक लेने के लिए पहनना पड़ा हिजाब

By विनीत कुमार | Updated: February 6, 2023 13:01 IST

ईरान में भारत की तान्या हेमंत ने फज्र इंटरनेशनल चैलेंज बैडमिंटन टूर्नामेंट गोल्ड मेडल जीता। हालांकि, उन्हें पदक समारोह के लिए पोडियम पर हिजाब पहनकर जाना पड़ा। हिजाब पहनने के निर्देश आयोजकों की ओर से थे।

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ठळक मुद्देईरान में फज्र इंटरनेशनल चैलेंज बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारत की तान्या हेमंत ने गोल्ड मेडल जीता।तान्या हेमंत को हालांकि आयोजकों के कहने पर मेडल सेरेमनी के लिए हिजाब पहनकर पोडियम पर जाना पड़ा।इस टूर्नामेंट मैच के दौरान कोई विशेष ड्रेस कोड नहीं था लेकिन महिला खिलाड़ियों का खेल देखने की इजाजत पुरुषों को नहीं थी।

बेंगलुरु: कर्नाटक की तान्या हेमंत ने ईरान फज्र इंटरनेशनल चैलेंज बैडमिंटन टूर्नामेंट में रविवार को महिला एकल का खिताब जीता। हालांकि, अपना गोल्ड मेडल प्राप्त करने के लिए उन्हें हिजाब पहनकर पोडियम पर आना पड़ा।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दूसरी वरीय 19 साल की तान्या प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्होंने टूर्नामेंट के महिला एकल के फाइनल में 30 मिनट में गत चैंपियन और हमवतन तसनीम मीर को मात दी।

बेंगलुरू की तान्या ने पहले गेम में अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरे गेम में भी उन्हें शीर्ष वरीय खिलाड़ी से थोड़ा ही प्रतिरोध का सामना करना पड़ा और वे आखिरकार मैच को 21-7, 21-11 से जीतकर खिताब अपने नाम करने में कामयाब रहीं।

मैच के बाद हिजाब पहनने को कहा गया

मैच खत्म होने बाद आयोजकों ने तान्या को पदक समारोह के लिए एक हिजाब पहनने के लिए कहा। ऐसा ही पिछली बार भी हुआ था, जब तसनीम ने खिताब जीता था।

बैडमिंटन सूत्रों के अनुसार आयोजकों ने स्पष्ट कर दिया था कि महिला पदक विजेताओं के लिए हिजाब अनिवार्य होगा। हालांकि टूर्नामेंट के प्रॉस्पेक्टस में पोडियम पर ड्रेस कोड को लेकर कोई जिक्र नहीं है।

सूत्र ने कहा, 'प्रॉस्पेक्टस में बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन के प्रतियोगिता नियमों की तरह ही कपड़ों के नियमों के बारे में बात की गई है। यह ड्रेस कोड दुनिया भर के टूर्नामेंटों में आम है। जबकि हम जानते थे कि तेहरान में महिलाओं के बाहर निकलने पर हिजाब अनिवार्य है। टूर्नामेंट के दौरान इसके उपयोग के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं था।'

महिला खिलाड़ियों का खेल देखने की पुरुषों को नहीं थी इजाजत

महिला खिलाड़ियों को अपने मैचों के दौरान इस तरह के प्रतिबंधों या ड्रेस कोड आदि का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि किसी भी पुरुष दर्शक को उन्हें खेलते हुए देखने की अनुमति नहीं थी। प्रवेश द्वार पर एक स्टिकर लगा रहता था। इस पर लिखा था, 'किसी पुरुष को अनुमति नहीं है।' 

पूरे टूर्नामेंट में किसी महिला खिलाड़ी के पुरुष कोच होने पर या उसके पिता को भी मैच देखने की इजाजत नहीं थी।

पहली बार टूर्नामेंट में मिश्रित युगल भी

खास बात यह भी रही कि इस टूर्नामेंट में कथित तौर पर पहली बार मिश्रित युगल वर्ग को भी शामिल किया गया था। इसमें दुनिया भर के 10 युगल खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।

सूत्रों के अनुसार,  'महिलाओं के मैच सुबह और पुरुषों के दोपहर में होते थे। महिला दर्शकों को ही महिला खिलाड़ियों के मैच देखने की अनुमति थी। साथ ही महिलाओं के मैचों में सभी मैच अधिकारी महिलाएं ही रहती थीं। इस दौरान अपनी बेटियों के साथ गए पिता को एक भी मैच देखने को नहीं मिला। केवल मिश्रित युगल के दौरान ही पुरुष और महिला खिलाड़ियों को कोर्ट पर एक साथ देखा गया था।'

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