लखनऊ : सूबे की योगी सरकार देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस वे बनाने बनाने वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश का प्रचार करती है. लेकिन उत्तर प्रदेश की सड़कें हत्यारों से भी बेरहम हैं, सूबे की सरकार लोगों को यह नहीं बताती. जबकि उत्तर प्रदेश अब देश का एक ऐसा राज्य बन गया हैं जहां हत्या की तुलना में आठ गुना मौतें सड़क हादसों में हो रही हैं. देश के सबसे बड़े राज्य के लिए दुर्भाग्य है कि यहां हर वर्ष करीब 27 हजार से अधिक लोग सड़क पर कुप्रबंधन, बढ़ती भीड़, बेतरतीब ट्रैफिक और तेज रफ्तार में वाहन चलाने की वजह से काल के मुंह में समा रहे हैं. यह सही है कि सड़कें मंजिल पर पहुंचाती हैं, लेकिन इन पर तेज गति से चलते अनियंत्रित वाहन आए दिन किसी न किसी घर में मातम मनवाते हैं. अब यह कहा जा रहा है कि यूपी की सड़कों पर हर दिन होने वाली दुर्घटनाओं के चलते कब किस पल किसके सपने बिखर जाएं, किसी को पता नहीं है.
एनसीआरबी के आंकड़े
हाल ही जारी हुए नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में 3491 लोगों की ह्त्या हुई. जबकि वर्ष 2023 में 3206 और वर्ष 2024 में 3218 लोगों की हत्या करने की घटनाएं घटी. इसके विपरीत प्रदेश में वर्ष 2023 में कुल 37,764 सड़क हादसे हुए, इनमें 23,947 लोग मारे गए और 23,843 लोग घायल हुए.
इसी प्रकार वर्ष 2024 में 38,417 सड़क हादसों में 22,923 लोगों की मौत हुई और 25,437 लोग घायल हुए. जबकि वर्ष 2025 में 50,769 सड़क हादसों में 27,205 लोगों को मौत हुई और 38,869 लोग घायल हुए. सड़क हादसों में लोगों के जान गँवाने का यह आंकड़ा यह आंकड़ा चिंतनीय है क्योंकि यह हर साल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसा नहीं है कि सड़क हादसों में आम लोगों की जान गई है, बड़े बड़े विख्यात लोगों को सड़क हादसों ने हमसे छीना है.
प्रख्यात साहित्यकार पं. विद्या निवास मिश्र से लेकर शिक्षक नेता पंचानन राय जैसे विशिष्ट लोगों की मौत सड़क हादसे में ही हुई है. पुलिस के अफसरों का कहना है कि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने, सड़क पर अतिक्रमण और आपात सेवा की कमी कारण है, अधिकांश लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई है. आगरा, कानपुर, लखनऊ प्रयागराज, मेरठ आदि शहरों में सड़क हादसों में वृद्धि हुई है. देश के सभी बड़े महानगरों से ज्यादा दुर्घटनाएं कानपुर में होती हैं.
सड़क हादसों पर रोक के लिए उठाए गए कदम :
प्रदेश के 8000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और सात एक्सप्रेसवे पर रोज होने वाली दुर्घटनाओं की स्थिति में मौके पर कार्यवाही, मदद और इलाज के लिए प्र्याप्त संख्या में एंबुलेंस और क्रेन उपलब्ध की कमी है. केवल बड़ी और व्यस्त सड़कों पर ही एंबुलेंस तथा क्रेन उपलब्ध हैं. सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर करने लिए कम से कम 200 से अधिक एंबुलेंस और करीब 150 क्रेन की आवश्यकता है.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की कमेटी आन रोड सेफ़्टी ने सड़क हादसों में कमी लाने के लिए नियमों को सख्त किया है. जिसके तहत डीजीपी राजीव कृष्णा के अनुसार, प्रदेश में सड़क हादसों में कमी लाने और घायलों के इलाज के लिए कई कदम उठाए गए है. जिसके चलते एंबुलेंस और क्रेन की संख्या में इजाफा किया जा रहा है. इसके साथ ही सूबे के 20 जिलों के प्रमुख मार्गों पर सी-आरटीसी (सिटी रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन) योजना की शुरुआत की है. इसके तहत कुल 172 चिन्हित मार्गों पर रूट मार्शल की तैनाती की जा रही है.
इन 20 जिलों में कानपुर, लखनऊ,आगरा, बांदा, अयोध्या, आजमगढ़, अलीगढ़,बरेली, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गोरखपुर, गोंडा, झांसी, मथुरा, मेरठ, वाराणसी मीरजापुर,मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी में सड़क हादसों को रोकने के लिए रूट मार्शल तैनात किए गए है. डीजीपी के अनुसार, सी-आरटीसी कार्यक्रम का लक्ष्य पीक आवर्स में शुरुआत के बिंदु और अंतिम बिंदु के बीच यात्रा के समय को कम करना है और यात्रा के प्रवाह को निर्बाध और सुचारू रखने के लिए मार्गां को अवरोध मुक्त रखना है, ताकि सड़क दुर्घटनों में कमी लायी जा सके.
यूपी में तीन वर्षों में हुई सड़क दुर्घटना का ब्यौरा
वर्ष कुल हादसे मरे लोग घायल हुए 2023 37,764 23,947 238432024 38,417 22,923 25,437 2025 50,7469 27,205 97f7 38,869