फिर फेल हुए आकाश आनंद, मायावती परेशान! बंगाल, तमिलनाडु और केरल में बुरी तरह हारी बसपा
By राजेंद्र कुमार | Updated: May 5, 2026 18:01 IST2026-05-05T18:01:33+5:302026-05-05T18:01:33+5:30
बिहार के विधानसभा चुनावों में आकाश आनंद पार्टी सुप्रीमो की उम्मीदों पर खरे साबित नहीं हुए थे. ऐसे में अब पश्चिम बंगाल, तामिलनाडु और केरल में भी आकाश आनंद के फेल होने से मायावती ख़ासी परेशान है.

फिर फेल हुए आकाश आनंद, मायावती परेशान! बंगाल, तमिलनाडु और केरल में बुरी तरह हारी बसपा
लखनऊ: चुनावों में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन लगातार जब हर चुनाव में हार हो यह समझ लेना चाहिए पार्टी के चुनावी प्लान में ही समस्या है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ बीते कई वर्षों से यही हो रहा है. और अब पश्चिम बंगाल, तामिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव में बसपा को फिर से हार का स्वाद चखना पड़ा है. पार्टी इन तीनों राज्यों में एक फीसद वोट भी नहीं जुटा सकी और इन तीनों राज्यों में पार्टी के सभी उम्मीदवारों को करारी हार का समाना करना पड़ा है. इन तीनों राज्यों में पार्टी को जिताने की ज़िम्मेदारी बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद को मिली थी, लेकिन वह अपना दायित्व निभाने में पूरी तरह से फेल हुए.
बिहार के विधानसभा चुनावों में आकाश आनंद पार्टी सुप्रीमो की उम्मीदों पर खरे साबित नहीं हुए थे. ऐसे में अब पश्चिम बंगाल, तामिलनाडु और केरल में भी आकाश आनंद के फेल होने से मायावती ख़ासी परेशान है. कहा जा रहा है कि मायावती पार्टी को लगातार मिल रही शिकस्त को रोकने के लिए कई कठोर फैसले ले सकती हैं. जल्दी ही इस संबंध में मायावती पार्टी के नेताओं से विचार-विमर्श कर फैसला लेंगी. इ
इसलिए फेल हुए आकाश
पार्टी नेताओं के अनुसार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में पार्टी संगठन को मजबूत करने और दलितों के साथ अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने की कवायद विधानसभा चुनावों में पूरी तरह फेल हो गई. इन तीनों ही राज्यों में मायावती के उत्तराधिकारी माने जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को किसी ने नोटिस की नहीं किया. जबकि मायावती ने इन तीनों राज्यों में प्रत्याशी उतारने के साथ वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी चुनावी मोर्चे पर भेजा था. इनमें आकाश आनंद के साथ उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ, जयप्रकाश आदि कद्दावर नेता शामिल थे. आकाश ने तो पश्चिम बंगाल में कई रैली भी की थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा हुआ था, लेकिन यह भीड़ वोट में तब्दील नहीं हुई.
मायावती तमिलनाडु और केरल में भी कुछ सीटें जीतने की उम्मीद थी, जो परवान नहीं चढ़ सकी. पार्टी नेताओं के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बसपा को 0.18% वोट मिले तो तमिलनाडु में 0.11% वोट और केरल में 0.15% वोट ही आए. इस खराब नतीजे को लेकर बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी में आंतरिक भितरघात, पदाधिकारियों की लापरवाही और समन्वय की कमी के कारण यह रिजल्ट आया और आकाश आनंद की मेहनत पूरी तरह से बेकार गई. वह फिर फेल हो गए यह मायावती के लिए परेशानी का सबब है. चर्चा यह भी है कि मायावती यूपी में किसी दल के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की संभावना पर भी विचार करने लगी है.
गठबंधन कर चुनाव लड़ने की सोच रही मायावती
कुछ पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि इन तीनों राज्यों में मायावती चुनाव प्रचार करने नहीं गई. जबकि पिछले चुनावों में इन राज्यों में वह चुनाव प्रचार करने गई थी. इस बार उन्होने आकाश आनंद को ही इन राज्यों में पार्टी प्रत्याशियों को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हे फैसले लेने की भी छूट दी, लेकिन आकाश नंद सफल नहीं हुए. अगर आकाश के साथ मायावती ने इस तीनों राज्यों में चुनावी रैली की होती तो शायद बसपा का चुनावी रिजल्ट बेहतर होता. यह दावा करने वाले बसपा नेताओं का कहना है इन तीनों राज्यों में फेल हुए आकाश आनंद को अभी मायावती के अधीन रहते हुए और ट्रेनिंग लेने की जरूरत है.अभी आकाश आनंद दलित समाज को एकजुट करने के लिए पूरी तरह से सक्षम नहीं है.
फिलहाल इन तीनों राज्यों के चुनाव नतीजों से साफ हो गया कि बसपा को खासकर दक्षिण के राज्यों में अपनी जड़ें जमाने के लिए खासी मशक्कत करनी होगी. इसके अलावा अगर यूपी में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए मायावती ने ध्यान नहीं दिया तो इस राज्य में बसपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा. इसका अहसास मायावती को हो गया है, इसके चलते ही वह यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कई अहम फैसले जल्दी ही लेंगी. इसके एक फैसला यह भी हो सकता है कि यूपी में किसी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा जाए. यह दल कौन हो इसके बारे में मायावती पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श कर फैसला लेंगी.
पार्टी के सीनियर नेताओं का यह कहना है. हालांकि मायावती हर बार यह दावा करती रही हैं कि वह अकेले की चुनाव लड़ेंगी, लेकिन वर्ष 2019 के बाद से बसपा को हर चुनाव में मिल रही हार का संज्ञान लेते हुए ही अब मायावती यह सोच रही है कि बदली हुई परिस्थिति में किसी दल के साथ चुनावी गठबंधन कर के चुनाव लड़ने पर विचार किया जा सकता है. इस बारे में पार्टी नेताओं के विचार जानने के बाद मायावती फैसला लेंगी.