मुकदमों में देरी पर माफी के अधिकार का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करें : न्यायालय

By भाषा | Updated: December 23, 2021 19:35 IST2021-12-23T19:35:35+5:302021-12-23T19:35:35+5:30

Use the right to condone delay in cases judiciously: Court | मुकदमों में देरी पर माफी के अधिकार का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करें : न्यायालय

मुकदमों में देरी पर माफी के अधिकार का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करें : न्यायालय

नयी दिल्ली23 दिसंबर उच्चतम न्यायालय का कहना है कि मुकदमा दायर करने में होने वाली देरी पर माफी के अधिकार का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए और अगर अदालतें बिना समुचित कारण बताए माफी देने लगीं तो यह वैधानिक सिद्धांतों के उल्लंघन और कानूनों का अपमान करने के समान होगा।

न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ ने कहा कि मुकदमे के लिए समय सीमा तय करने का उद्देश्य सभी के कल्याण के हेतु न्याय के अधिकार के लिए समय तय करने की सार्वजनिक नीति पर आधारित है।

न्यायालय ने कहा कि समय सीमा तय करने का उद्देश्य यह है कि कोई भी पक्ष बेकार में देरी करने का तरीका ना अपनाए और तत्काल कानूनी समाधान खोजे।

हाल ही के एक आदेश में न्यायालय ने कहा, ‘मुकदमे में देरी के लिए माफी देने के अधिकार का उपयोग प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। यह भी कहा गया है कि अगर किसी पक्ष की ओर से लापरवाही, निष्क्रियता या प्रमाणिकता की कमी सामने आती है तो ऐसे में ‘समुचित कारण’ को सरलता से तय नहीं किया जा सकता है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘संभव है कि समय सीमा से किसी पक्ष के अधिकार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हों, लेकिन उसे कानून में तय तरीके से ही लागू करना होगा।’’

देरी के लिए माफी सामान्य तौर पर देशभर की अदालतों में मुकदमे या आवेदन दायर करने में हुई देरी के मामले में लागू होता है।

शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर ये टिप्पणियां कीं। इस मामले में उच्च न्यायलाय ने दूसरी अपील दायर करने में 1011 दिन का विलंब माफ कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने यह निर्णय निरस्त कर दिया और कहा किइस विलंब को माफ करने में उच्च न्यायालय का अपने विवेक का इस्तेमाल न्यायाचित नहीं था।

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Web Title: Use the right to condone delay in cases judiciously: Court

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