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गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए: किसान संगठन

By भाषा | Updated: February 13, 2021 21:10 IST

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नयी दिल्ली, 13 फरवरी कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने शनिवार को कहा कि दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा और कथित तौर रूप से किसानों पर दर्ज किए गए “झूठे” मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए।

सिंघू बॉर्डर पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम)के नेताओं ने किसानों से कहा कि पुलिस का नोटिस मिलने पर वे सीधे पुलिस के सामने उपस्थित न हों और इसकी बजाय किसान संगठनों द्वारा बनाए गए विधिक प्रकोष्ठ की सहायता लें।

एसकेएम के विधिक प्रकोष्ठ के सदस्य कुलदीप सिंह ने कहा कि 26 जनवरी को हुई हिंसा के पीछे की “साजिश” का पर्दाफाश करने और किसानों के विरुद्ध “झूठे मामले” दर्ज कराए जाने की जांच का जिम्मा उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपा जाना चाहिए।

एसकेएम नेताओं के मुताबिक, ट्रैक्टर परेड में शामिल 16 किसानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

एक अन्य नेता रविंद्र सिंह ने कहा कि 44 में से 14 प्राथमिकी के संबंध में 122 किसानों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी किसानों को एसकेएम, विधिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा।

सिंह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए प्रत्येक किसान को जेल की कैंटीन में खर्च करने के लिए दो हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि एसकेएम के विधिक दल ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल का दौरा किया जहां इस समय 112 किसानों को रखा गया है।

किसान संगठनों के नेताओं ने दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा से आग्रह किया है कि वह किसानों को एक जेल में रखा जाना सुनिश्चित कराएं।

एक वक्तव्य में एसकेएम ने मांग की है कि उसके विधिक प्रकोष्ठ को गिरफ्तार किए गए किसानों से मिलने और उन्हें वित्तीय सहायता देने की अनुमति दी जाए।

वक्तव्य में कहा गया, “एसकेएम के विधिक प्रकोष्ठ ने दिल्ली सरकार और पुलिस द्वारा किसानों को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत नोटिस जारी करने और झूठे मामलों में फंसाने की कड़ी निंदा की है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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