लाइव न्यूज़ :

PMLA पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ईडी के गिरफ्तारी के हक को बरकरार रखा, कहा- ये प्रक्रिया मनमानी नहीं

By विनीत कुमार | Updated: July 27, 2022 12:10 IST

सुप्रीम कोर्ट ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा है कि हर मामले में ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) आरोपी को देना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने ईडी की गिरफ्तारी के अधिकार को बरकरार रखा।

Open in App
ठळक मुद्देपीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय के गिरफ्तारी के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।कोर्ट ने कहा- आरोपी को ईसीआईआर की कॉपी देना अनिवार्य नहीं, केवल बता देना काफी कि उसे क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है।पीएमएलए के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में दी गई थी चुनौती।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गिरफ्तारी के अधिकार को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ईडी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया मनमानी नहीं है। कोर्ट ने पीएमएलए के कई प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को लेकर ये फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) प्रवर्तन निदेशालय का एक आंतरिक दस्तावेज है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को ईसीआईआर की कॉपी देना अनिवार्य नहीं है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को केवल यह बता देना काफी है कि उसे किन आरोपों के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है।

पीएमएलए को असंवैधानिक बताते हुए डाली गई थी याचिका

पीएमएलए के कई प्रावधानों को याचिकाकर्ताओं ने असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में इसे चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि गिरफ्तारी के आधार या सबूत के बिना आरोपी को गिरफ्तार करने की अनियंत्रित शक्ति असंवैधानिक है।

कोर्ट ने इससे पहले पीएमएलए के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। पीएमएलए के खिलाफ याचिका डालने वालों में में कार्ति चिदंबरम और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सहित अन्य कुछ लोग शामिल हैं।

बताते चलें कि दो दिन पहले सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि कानून लागू होने के बाद पिछले करीब 17 साल में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए के तहत लगभग 5,422 मामले दर्ज किए। मामले दर्ज होने के बाद पीएमएलए के प्रावधानों के तहत करीब 1,04,702 करोड़ रूपये की सम्पत्ति कुर्क की गई, 992 मामलों में अभियोग शिकायत दर्ज की गई जिसके परिणामस्वरूप 869.31 करोड़ रूपये की जब्ती की गई और 23 अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। 

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टप्रवर्तन निदेशालय
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

क्राइम अलर्टकिशनगंज, पूर्णिया, अररिया, पटना और सिलीगुड़ी में दबिश?, एसडीपीओ गौतम कुमार और डीआरडीए डायरेक्टर वैभव कुमार के ठिकानों पर छापेमारी, महिला मित्र शगूफ्ता खातून के नाम पर जमीन

क्राइम अलर्ट200 नहीं 1500 करोड़ रुपये का मालिक जालसाज अशोक खरात?, कई बैंक खाते सील, विशेष जांच दल ने जमीन, भूखंड, फ्लैट और वाहनों की जानकारी मांगी

भारत अधिक खबरें

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील