आप बड़ी मछलियों को नहीं पकड़ते, सिर्फ गरीब किसानों को परेशान करते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को लताड़ लगाई

By भाषा | Published: May 16, 2022 08:41 PM2022-05-16T20:41:48+5:302022-05-16T20:54:00+5:30

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और वे इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

Supreme Court slams Bank of Maharashtra “You don’t catch big fish, you only harass poor farmers” | आप बड़ी मछलियों को नहीं पकड़ते, सिर्फ गरीब किसानों को परेशान करते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को लताड़ लगाई

इस तरह के मुकदमे से किसानों के परिवारों को भारी वित्तीय नुकसान होगा। हमें खेद है कि हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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Highlightsस्वीकृति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज की जाती हैं।36.50 लाख रुपये का 95.89 प्रतिशत निर्धारित समय में जमा करा दिया है।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने के लिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) को लताड़ लगाई है। न्यायालय ने बैंक को किसानों के एकमुश्त निपटान (ओटीएस) प्रस्ताव को स्वीकार करने और उन्हें स्वीकृति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की खिंचाई करते हुए कहा, ‘‘आप बड़ी मछलियों को नहीं पकड़ते, सिर्फ गरीब किसानों को परेशान करते हैं।’’ न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है और वे इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

पीठ ने 13 मई को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘मौजूदा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के बारे में हमारा विचार है कि उच्च न्यायालय का निर्देश अत्यंत न्यायसंगत और निष्पक्ष है। इसलिए न्यायालय के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करे। ऐसे में विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’’

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘आप बड़ी मछलियों (बड़े लोगों या कंपनियों) के पीछे नहीं जाते और केवल गरीब किसानों को परेशान करते हैं, जिन्होंने 95 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया है। इन किसानों ने ऋण लेकर ओटीएस योजना के तहत निर्धारित राशि का प्रस्ताव स्वीकार कर 36.50 लाख रुपये का 95.89 प्रतिशत निर्धारित समय में जमा करा दिया है।’’

पीठ ने बैंक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गरिमा प्रसाद से कहा कि वे एकतरफा तरीके से समझौता राशि को बढ़ाकर 50.50 लाख रुपये नहीं कर सकते, क्योंकि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ और तर्कहीन है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में इस तरह के मुकदमे से किसानों के परिवारों को भारी वित्तीय नुकसान होगा। हमें खेद है कि हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

इस मामले में कानून के अनुरूप उचित फैसले का रास्ता खुला है।’’ पीठ ने बैंक की ओर दायर अपील का निपटारा कर दिया। मोहनलाल पाटीदार नाम के एक व्यक्ति ने बैंक से कर्ज लिया था और ओटीएस के तहत इसके भुगतान की पेशकश की थी। इसके बाद बैंक ने उसे नौ मार्च, 2021 को पत्र भेजा था।

पत्र के अनुसार, ओटीएस राशि 36,50,000 रुपये थी। पाटीदार ने इसके बाद यह राशि जमा करा दी थी। लेकिन बैंक की ऋण वसूली शाखा ने 25 अगस्त, 2021 को उसे पत्र भेजकर सूचित किया था कि इस प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष रखा गया।

पत्र में कहा गया है कि अपने बकाये के पूर्ण निपटान के लिए पाटीदार को 50.50 लाख रुपये जमा करने होंगे। उसके बाद पाटीदार ने उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने 21 फरवरी को जारी आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रस्ताव को बैंक को स्वीकार करना होगा।

Web Title: Supreme Court slams Bank of Maharashtra “You don’t catch big fish, you only harass poor farmers”

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