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पंजाब में सेवा विस्तार की नीति खत्म, 60 नहीं 58 साल में होंगे रिटायर, नए रोजगार पैदा होने की संभावना

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 2, 2020 19:50 IST

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद बयान में कहा गया, ‘‘पंजाब सरकार ने राज्य के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने के मकसद से सेवानिवृत्ति के बाद सेवा अवधि में विस्तार के विकल्प की नीति को समाप्त करने का फैसला किया है।’’

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ठळक मुद्देराज्य सरकार ने इससे पहले 60 या 62 साल की आयु तक सभी वर्गों के कर्मियों की सेवा में विस्तार को मंजूरी दी थी। वित्त मंत्री मनप्रीत बादल की घोषणा के अनुसार आवश्यक बदलाव करने के लिए पंजाब सिविल सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी।

पंजाब सरकार ने सेवानिवृत्ति के बाद अपने कर्मियों की सेवा में विस्तार को मंजूरी देने वाली नीति सोमवार को समाप्त कर दी।

एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह फैसला 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति की आयु के स्थान पर पूर्ववर्ती सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष तय करने संबंधी बजट घोषणा के अनुरूप है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद बयान में कहा गया, ‘‘पंजाब सरकार ने राज्य के युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने के मकसद से सेवानिवृत्ति के बाद सेवा अवधि में विस्तार के विकल्प की नीति को समाप्त करने का फैसला किया है।’’

राज्य सरकार ने इससे पहले 60 या 62 साल की आयु तक सभी वर्गों के कर्मियों की सेवा में विस्तार को मंजूरी दी थी। राज्य कैबिनेट ने 28 फरवरी को बजट भाषण में वित्त मंत्री मनप्रीत बादल की घोषणा के अनुसार आवश्यक बदलाव करने के लिए पंजाब सिविल सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी।

इस निर्णय के साथ ही जो कर्मी वैकल्पिक सेवा विस्तार के दूसरे साल में है यानि जिनकी उम्र 59 या 61 वर्ष है और जिनके वैकल्पिक सेवा विस्तार का दूसरा साल एक अप्रैल 2020 से शुरू होना है वे 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

इसके अलावा जो कर्मी वैकल्पिक सेवा विस्तार के पहले साल में हैं यानि जिनकी उम्र 58 या 60 वर्ष है और जिनके वैकल्पिक सेवा विस्तार का पहला साल आरंभ होना है, वे 30 सितंबर, 2020 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। कैबिनेट ने पंजाब वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 में भी संशोधन का फैसला किया ताकि 2019-2020 में 928 करोड़ रुपए अतिरिक्त उधारी ली जा सके जो कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत की शुद्ध ऋण की इसकी सीमा से अधिक है।

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