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प्रज्ञा सिंह ठाकुर: जानिए, मालेगांव ब्लास्ट के आरोप से लेकर बीजेपी के रास्ते भोपाल से सांसद बनने की कहानी

By पल्लवी कुमारी | Updated: November 28, 2019 11:37 IST

मध्य प्रदेश की प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव ब्लास्ट और आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड के बाद चर्चा में आईं। प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव धमाके की आरोपी के तौर पर करीब 9 साल जेल में रहीं और फिर जमानत पर बाहर आईं। लोकसभा चुनाव-2019 में बीजेपी ने उन्हें भोपाल सीट से अपना उम्मीदवार बनाया।

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ठळक मुद्देकांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल से प्रज्ञा सिंह ठाकुर लोकसभा चुनाव-2019 में चुनावी मैदान में उतरीं थी और जीत गईं। प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव धमाके की आरोपी के तौर पर करीब 9 साल जेल में रहीं और फिर जमानत पर बाहर आईं।

मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा संसद में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को 'देशभक्त' बताने को लेकर विवाद छिड़ गया है। बीजेपी ने कार्रवाई करते हुए प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रक्षा मंत्रालाय की कमेटी से हटा दिया गया है। इसके साथ ही बीजेपी पार्टी की होने वाली संसदीय दल की बैठक में भी शामिल नहीं होने का आदेश दिया गया है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आज(28 नवंबर) संसद में प्रज्ञा सिंह ठाकुर के गोडसे 'देशभक्त' वाले बयान को लेकर वॉकआउट कर दिया है। इन सारी हलचलों के बाद प्रज्ञा सिंह ठाकुर चर्चा में आ गई हैं। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब प्रज्ञा सिंह ठाकुर विवादों में हैं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर का विवादों से गहना नाता है। आइए नजर डालते हैं कि  मालेगांव ब्लास्ट के आरोप से लेकर उनके सांसद बनने तक की सफर पर...। 

प्रज्ञा सिंह ठाकुर 2008 में मालेगंवा ब्लास्ट के बाद चर्चा में आईं

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल से प्रज्ञा सिंह ठाकुर लोकसभा चुनाव-2019 में चुनावी मैदान में उतरीं थी और जीत गईं। प्रज्ञा 2008 में मालेगंवा ब्लास्ट के बाद चर्चा में आई जब उन पर इन धमाकों में शामिल होने का आरोप लगा। दरअसल, महाराष्ट्र के मुस्लिम बहुल मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को बम धमाके हुए। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई महाराष्ट्र के एटीएस ने जनवरी-2009 में एक चार्जशीट दायर की जिसमें प्रज्ञा सहित 14 लोगों के नाम थे। प्रज्ञा अक्टूबर-2008 में हिरासत में लिया जा चुका था और एटीएस लगातार यह कह रही थी कि इस धमाके के पीछे के मास्टरमाइंड में से एक प्रज्ञा भी हैं। साल 2011 में गृह मंत्रालय ने यह मामला एनआईए को सौंप दिया।

नरेंद्र मोदी की सरकार आने पर  प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मिली बेल

बहरहाल, 2014 में केंद्र में सरकार बदली और नरेंद्र मोदी बहुमत के साथ सत्ता में आये। एनआईए ने जब 2016 में मालेगांव धमाके पर अपनी सप्लीमेंट्री जार्चशीट दाखिल की तो उसमें एटीएस की जांच को संदिग्ध बताते हुए प्रज्ञा और दूसरे और पांच लोगों को मुख्य आरोपी की लिस्ट से बाहर कर दिया। के लिए यहीं से राह आसान होती गई। बाद में उन्हें बेल भी मिल गई।

9 साल तक जेल में रहीं प्रज्ञा

प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव धमाके की आरोपी के तौर पर करीब 9 साल जेल में रहीं। प्रज्ञा ठाकुर मध्य प्रदेश से आती हैं वह इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उनका झुकाव शुरू से ही दक्षिणपंथ की ओर रहा है। प्रज्ञा ठाकुर ABVP की नेता और विश्व हिन्दू परिषद की महिला शाखा 'दुर्गा वाहिनी' में सक्रिय रही हैं। 

लोकसभा चुनाव-2019 प्रचार के दौरान भी गोडसे को देशभक्त बताया था

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ठाकुर ने गोडसे को देशभक्त करार दिया था जिसकी वजह से बड़ा राजनीतिक विवाद मचा था। बाद में उन्होंने अपने बयान के लिये माफी मांग ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालांकि कहा था, “गांधीजी या नाथूराम गोडसे के बारे में टिप्पणी बेहद खराब और समाज के लिये बेहद गलत थी....उन्होंने माफी मांग ली है लेकिन मैं उन्हें कभी भी मन से माफ नहीं कर पाउंगा।”

विवादित नेता ने एक रोडशो में शामिल होने के दौरान कहा था, “नाथूराम गोडसे एक देशभक्त थे, हैं और एक देशभक्त रहेंगे। जो लोग उन्हें आतंकवादी कहते हैं उन्हें अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। 

जानें 27 नवंबर 2019 को संसद में किस बात पर गोडसे को देशभक्त बताया प्रज्ञा ने 

बुधवार (27 नवंबर) को लोकसभा में डीएमके सांसद ए. राजा ने एसपीजी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रज्ञा ने  गोडसे को देशभक्त बताया। सांसद ए. राजा अदालत के समक्ष नाथूराम गोडसे द्वारा दिये गए उस बयान को उद्धृत कर रहे थे कि उसने महात्मा गांधी को क्यों मारा?  ए. राजा गोडसे का अदालत में दिया बयान पढ़ ही रहे थे कि हस्तक्षेप करते हुए प्रज्ञा ने गोडसे को देशभक्त बताया। बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने जैसे ही गोडसे को देशभक्त बताया सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना होने लगी। 

ठाकुर की टिप्पणी को लेकर विपक्षी सदस्यों द्वारा विरोध जताए जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि एसपीजी (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सिर्फ द्रमुक नेता का बयान ही रिकॉर्ड में जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने बाद में एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ठाकुर की टिप्पणी “दर्ज नहीं की गई है।”

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