लाइव न्यूज़ :

Jammu-Kashmir: ईद के आते ही कश्‍मीर में मीट की कीमतों में उछाल से नाराजगी

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 15, 2026 12:27 IST

Jammu-Kashmir: वे कहते थे कि पशुओं को ले जाने वाले ट्रकों को अभी भी शंभू और माधोपुर जैसी चौकियों पर उत्पीड़न और देरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सरकार अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाल पाई है।

Open in App

Jammu-Kashmir: जैसे-जैसे रमजान का पवित्र महीना अपने अंत की ओर बढ़ रहा है और ईद-उल-फितर बस कुछ ही दिन दूर है, कश्मीर के कई बाजारों में मटन की कीमतें कथित तौर पर बढ़कर लगभग 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। इससे उपभोक्ताओं में भारी गुस्सा है, जो अधिकारियों पर बाजार को नियंत्रित करने में नाकाम रहने का आरोप लगा रहे हैं।

श्रीनगर के विभिन्न हिस्सों और अन्य जिलों के निवासियों का कहना था कि कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी ने उन परिवारों पर एक अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, जो इस पवित्र महीने के दौरान पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।श्रीनगर के बेमिना इलाके के एक निवासी का कहना था कि हर साल वही कहानी दोहराई जाती है। जैसे-जैसे रमजान अपने आखिरी दिनों में पहुंचता है और ईद करीब आती है, मटन की कीमतें रातों-रात आसमान छूने लगती हैं, और कीमतों की जांच करने के लिए जमीन पर सरकार का कोई भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं होता।

वे कहते थे कि एक मध्यम-वर्गीय परिवार के लिए, 800 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर मटन खरीदना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है।

एक अन्य उपभोक्ता ने बाजारों में जांच टीमों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। उसका कहना था कि अगर सरकार ने कीमतें या नियम तय किए हैं, तो उन्हें लागू क्यों नहीं किया जा रहा है? लोगों को मजबूरन उसी कीमत पर सामान खरीदना पड़ रहा है, जिसकी मांग की जा रही है।

कई खरीदारों ने अधिकारियों पर बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके के निवासियों के एक समूह का कहनरा था कि अधिकारी गाड़ियों में घूमते हैं और बयान देते हैं, लेकिन जब जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने की बात आती है, तो वे कहीं भी नजर नहीं आते।

संपर्क किए जाने पर, मटन डीलर्स एसोसिएशन कश्मीर के महासचिव, मेराजुद्दीन का कहना था कि अधिकारियों ने इस स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वे कहते थे कि सरकार इस मामले में बिल्कुल भी कुछ नहीं कर रही है। वे इस मुद्दे पर पूरी तरह से सोए हुए हैं। उनका कहना था कि अधिकारी व्यापारियों और उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली समस्याओं को सुलझाने के बजाय सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय नजर आते हैं।

महासचिव का कहना था कि पंजाब से पशुओं के परिवहन से जुड़े मुद्दे को भी व्यापारियों द्वारा कई बार उठाया गया है, लेकिन तीन महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इस दिशा में अब तक कुछ भी नहीं किया गया है।

वे कहते थे कि पशुओं को ले जाने वाले ट्रकों को अभी भी शंभू और माधोपुर जैसी चौकियों पर उत्पीड़न और देरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि सरकार अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाल पाई है।

कई अन्य मटन डीलरों ने भी कहा कि एक उचित नियामक ढांचे की कमी ने भी इस समस्या को और बढ़ा दिया है। उनका कहना था कि प्रशासन द्वारा पहले के जम्मू और कश्मीर मटन (लाइसेंसिंग और नियंत्रण) आदेश, 1973' को रद्द करने के बाद—जिसके तहत अधिकारियों को व्यापार को विनियमित करने और कीमतों से जुड़ी अधिसूचनाओं को लागू करने का अधिकार था—बाजार को बड़े पैमाने पर बिना किसी प्रभावी निगरानी के ही चलने के लिए छोड़ दिया गया है।

एक डीलर ने का कहना था कि अगर सरकार सचमुच कीमतों को नियंत्रित करना चाहती है, तो उसे एक उचित कानून लाना चाहिए या एक विधेयक पारित करके इस व्यापार के लिए एक स्पष्ट नियामक प्रणाली बनानी चाहिए।

एक अन्य व्यापारी के बकौल, जब कोई स्पष्ट तंत्र ही मौजूद नहीं है, तो सरकार केवल डीलरों पर दोष नहीं मढ़ सकती। वे कहते थेकि जब पिछले नियामक आदेश को हटाया गया, तो सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण रखने से अपने हाथ खींच लिए। अब बाजार पूरी तरह से आपूर्ति और मांग के सिद्धांत पर चलता है।

टॅग्स :ईदजम्मू कश्मीरभोजन
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

भारतगंदरबल एनकाउंटर: 7 दिन में रिपोर्ट पेश करो?, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर लिखा

भारतअमरनाथ यात्रा पर पहलगाम नरसंहार की परछाई?, सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता, 29 जून को पूजा और 17 जुलाई से शुरू?

भारतJammu-Kashmir: पाक की ओर से जम्मू सीमा पर गोलीबारी, भारतीय रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट पर हमले की कोशिश नाकाम

भारत अधिक खबरें

भारतपश्चिम बंगाल चुनावः 4660 अतिरिक्त मतदान केंद्र?, कुल संख्या 85379 और 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में पड़ेंगे वोट

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

भारतFire Accident: ONGC मुंबई हाई प्लेटफॉर्म पर भीषण आग, 10 लोग घायल; राहत और बचाव कार्य जारी

भारतElection 2026: केरल में चुनावी हिंसा! शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन को भी पीटा, 5 धरे गए

भारतदेश के लिए समर्पित ‘एक भारतीय आत्मा’