PM Modi held a meeting today through video conference with Chief Ministers of 6 states, namely Assam, Bihar, Uttar Pradesh, Maharashtra, Karnataka & Kerala | बाढ़ से बेहालः पीएम मोदी ने असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के सीएम से की बात, बेहतर समन्वय पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की।

Highlightsपश्चिम चंपारण, खगड़िया, सारण, समस्तीपुर, सिवान, मधुबनी, मधेपुरा एवं सहरसा जिले भी बाढ़ से प्रभावित हैं।सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।जिलों के 125 प्रखंडों की 1232 पंचायतों में 74 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

नई दिल्लीः देश के कई राज्यों में बाढ़ से हालात ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की।

दक्षिण-पश्चिमी मानसून और वर्तमान में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 6 राज्यों असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक बैठक की।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ के लिए पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली में सुधार के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ के पूर्वानुमान के वास्ते स्थायी व्यवस्था के लिए केंद्र एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार को एक ऑनलाइन बैठक की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार को एक ऑनलाइन बैठक की। उन्होंने पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली में सुधार के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने यह जानकारी देते हुए बताया कि देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून और बाढ़ की वर्तमान स्थिति से निपटने के वास्ते तैयारियों की समीक्षा के लिए असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल बैठक में शामिल हुए। पीएमओ ने एक बयान में बताया कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए एक स्थायी प्रणाली के वास्ते सभी केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ पूर्वानुमान के लिये एक स्थायी प्रणाली को लेकर केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर सोमवार को जोर दिया। उन्होंने (बाढ़) पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली को बेहतर करने के लिये नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी का व्यापक करने पर भी बल दिया।

प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थित की समीक्षा के लिये छह राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ एक डिजिटल बैठक में यह टिप्पणी की। बैठक में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल शामिल हुए। इस बैठक का आयोजन दक्षिण-पश्चिम मानसून और देश में बाढ़ की मौजूदा स्थिति से निपटने में उनकी तैयारियों की समीक्षा के लिये बुलाई गई थी।

बैठक में मोदी ने स्थानीय स्तर पर पूर्व चेतावनी प्रणाली में निवेश बढ़ाये जाने पर जोर दिया

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक बयान में कहा गया है कि बैठक में मोदी ने स्थानीय स्तर पर पूर्व चेतावनी प्रणाली में निवेश बढ़ाये जाने पर जोर दिया, ताकि इलाके के लोग नदी के तटबंध में दरार पड़ने, इलाके के जलमग्न होने या बिजली गिरने जैसे खतरों के मामले में समय रहते आगाह हो सकें। यह बैठक करीब डेढ़ घंटे चली, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और जी किशन रेड्डी तथा केंद्रीय मंत्रालयों एवं संबद्ध संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर राज्यों द्वारा लोगों को राहत एवं बचाव कोशिशों के दौरान मास्क पहनने, हाथ स्वच्छ रखने और एक दूसरे से पर्याप्त दूरी रखने जैसे स्वास्थ्य संबंधी सभी एहतियातों का पालन अवश्य सुनिश्चित कराना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राहत सामग्री में हाथ धोने एवं सेनेटाइज करने के लिये वस्तुएं तथा प्रभावित लोगों के लिये मास्क के लिये प्रावधान शामिल किये जाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वृद्ध लोगों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से ग्रसित लोगों के लिये विशेष प्रावधान किये जाने चाहिए।

सभी विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाएं स्थानीय आपदाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जाएं

उन्होंने कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी विकास एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाएं स्थानीय आपदाओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जाएं, जिससे आगे चल कर भविष्य में होने वाले नुकसान को घटाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने इस बात का जिक्र किया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत मौसम विज्ञान विभाग और केंद्रीय जल आयोग जैसे पूर्वानुमान एजेंसियों ने बाढ़ पूर्वानुमान की कहीं अधिक बेहतर एवं उपयोगी समन्वित कोशिशें की हैं।

उन्होंने कहा कि वे न सिर्फ बारिश और नदी के जल स्तर के पूर्वानुमान मुहैया कर रही हैं, बल्कि जलमग्न होने के संभावित स्थानों के बारे में भी सूचना दे रही हैं। स्थान विशेष आधारित पूर्वानुमानों को बेहतर करने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिये पायलट परियोजनाएं भी जारी हैं। इनके लिये राज्यों को इन एजेंसियों को आवश्यक सूचना मुहैया करनी चाहिए तथा समय पर स्थानीय समुदायों को चेतावनी जारी करनी चाहिए।

पीएमओ के बयान में कहा गया है, ‘‘ प्रधानमंत्री ने बाढ पूर्वानुमान के लिये एक स्थायी प्रणाली को लेकर सभी केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तथा बेहतर (बाढ़) पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली के लिये नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। ’’ बयान के मुताबिक असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल के मुख्यमंत्रियों और कर्नाटक के गृह मंत्री ने अपने-अपने राज्य में बाढ़ की स्थिति तथा राहत एवं बचाव कार्यों पर ताजा जानकारी दी।

उन्होंने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) सहित केंद्रीय एजेंसियों की सराहना की क्योंकि उनकी टीमों के समय पर तैनाती से लोगों को बचाने में मदद मिली है। राज्यों ने बाढ़ के प्रभाव को घटाने के लिये कुछ अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों के लिये सुझाव भी दिये।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को इन सुझावों पर कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र विभिन्न आपदाओं से निपटने में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सहयोग मुहैया करना जारी रखेगा। बैठक में उपस्थित लोगों के मुताबिक मोदी ने कहा कि वह सभी राज्यों का दौरा करते, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण ऐसा नहीं कर सके हैं।

गुजरात में भारी बारिश के कारण मकान ढहने से तीन लोगों की मौत

गुजरात के पंचमाहल जिले में सोमवार की सुबह भारी बारिश के कारण एक मकान ढहने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पंचमाहल की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने बताया कि जंबूघोडा तालुका के कांजीपनी गांव में स्थित एक मकान में एक परिवार के चार सदस्य सो रहे थे कि इसी दौरान सुबह लगभग छह बजे यह हादसा हुआ।

उन्होंने बताया, ‘‘भारी बारिश के कारण मकान ढह गया। हादसे में चार वर्षीय एक बालक समेत तीन लोगों की मौत हो गई जबकि परिवार का एक सदस्य मामूली रूप से घायल हो गया।’’ उन्होंने बताया कि बचाव टीम ने शव मलबे से निकाल लिये है। उन्होंने बताया कि मृतकों में 70 वर्षीय एक महिला, उसका 40 वर्षीय बेटा और पौत्र शामिल हैं।

मलबे से सोमवार को 5 और लोगों के शव मिलने के बाद मृतक संख्या बढ़कर 48

केरल के इडुक्की जिले में तीन दिन पहले हुए भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुए मकानों के मलबे से सोमवार को 5 और लोगों के शव मिलने के बाद मृतक संख्या बढ़कर 48 हो गई। अभी मरने वाले की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

वर्षा और बांधों से पानी छोड़े जाने की वजह से उत्तर प्रदेश में 20 जिलों के 800 से ज्यादा गांव प्रभावित हैं। राहत आयुक्त कार्यालय की प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वक्त में प्रदेश के अंबेडकर नगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, देवरिया, गोंडा, गोरखपुर, खीरी, कुशीनगर, महराजगंज, मऊ, पीलीभीत, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर तथा सीतापुर के 802 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।

इनमें से 428 गांव का संपर्क दूसरे इलाकों से पूरी तरह कट गया है। रिपोर्ट के मुताबिक शारदा नदी पलियाकलां (लखीमपुर खीरी) में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा राप्ती नदी बर्डघाट (गोरखपुर) में, घाघरा नदी एल्गिनब्रिज (बाराबंकी), अयोध्या और तुर्तीपार (बलिया) में खतरे के निशान को पार कर गई है।

बाढ़ जैसी स्थिति बनने और भूस्खलन होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा

कर्नाटक के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बनने और भूस्खलन होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के मलनाड, तटीय और उत्तर आंतरिक क्षेत्रों में कई स्थान मूसलाधार बारिश की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

इन क्षेत्रों की अधिकतर नदियों का जलस्तर बढ़ गया हैं, वहीं कोडागु और चिक्कमगलुरु के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण भूस्खलन की खबरें आ रही हैं। बेलगावी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है वहीं महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में हुई बारिश और वहां के बांधों से पानी छोड़े जाने से कृष्णा नदी और उसकी सहायक नदियों के जल स्तर में वृद्धि हुई है। लगातार हो रही बारिश से जिले के निचले इलाकों और कृषिभूमि को भी नुकसान पहुंच रहा है। उत्तर कन्नड़ और शिवमोगा जिलों में भी नदियों में उफान के कारण निचले इलाकों की बाढ़ जैसी स्थिति है।

असम में बाढ़ की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है, हालांकि राज्य के दस जिलों में अब भी करीब 84,100 लोग इससे प्रभावित हैं। एक आधिकारिक बुलेटिन में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गयी। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने कहा कि अभी, 177 गांव और 15,964 हेक्टेयर भूमि जलमग्न है। बुधवार को 15 जिलों के 270 गांवों में 1.43 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे। असम में इस साल बाढ़ और भूस्खलन के कारण 136 लोगों की मौत हो गयी।

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